वीरोदय तीर्थ देखकर मन आनंदित होते गया मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज
बड़ोदिया
मुनि श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज ने कहा कि वीरोदय तीर्थ देखकर मन आनंदित हो गया। इतना सुंदर तीर्थ जंगल में है यह पहले पता होता तो चार-पांच दिन रुकता। महाराज श्री ने यहां की प्रतिमा को अतिशयकारी बताया।
मुनि श्री ने कहा कि वागड़ में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रकल्पों, हथकरघा, गौशाला और प्रतिभास्थली को पूरा करना हमारा उद्देश्य है। वागड़ में इसकी प्रबल संभावनाए है। महाराज श्री ने बताया कि वागड़ क्षेत्र में जैन समाज के 72 गांव हैं। हर गांव के बीच एक हथकरघा खोलने से चार पांच हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है। समाज के कमजोर व्यक्ति की सहायता करना जरूरी है। उन्हें आगे बढ़ाना होगा तभी समाज और धर्म का विकास होगा।

महाराज श्री ने कहा कि केवल तीर्थ बनाने से विकास नहीं होगा। तीर्थ की रक्षा करनी है तो हथकरघा, गौशाला और प्रतिभास्थली खोलनी होगी। जहां लड़कियों को शिक्षा और संस्कार मिले। तभी तीर्थ की रक्षा संभव है। इससे पूर्व महाराज श्री के सानिध्य में श्री जी का अभिषेक एवं शांति धारा की गई।

मुनि श्री ने तीर्थ का अवलोकन किया तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष मोहनलाल पिंडारमिया और उपाध्यक्ष राजीव गांधी ने उन्हें निर्माण कार्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह वागड़ का सबसे बड़ा तीर्थ बन रहा है। इसमें भगवान श्री आदिनाथ का मुख्य मंदिर, समवशरण मंदिर, चौबीसी मंदिर, नद्यावर्तक, स्वास्तिक, सहस्त्र कूट जिनालय संत भवन और यात्री कक्षों का निर्माण हो रहा है। वागड़ के श्रद्धालु इसके निर्माण में हरसंभव योगदान दे रहे हैं।
मुनि श्री विनम्र सागर जी महाराज एवं समस्त संघ ने तीर्थ को देखकर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि एक तीर्थ का निर्माण पूरे क्षेत्र को हर्ष और खुशहाली से भर देता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



