आचार्य श्री शांति सागर महाराज का संपूर्ण जीवन आत्म साधना तप और धर्म प्रचार में समर्पित रहा प्रज्ञासागर महाराज 

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आचार्य श्री शांति सागर महाराज का संपूर्ण जीवन आत्म साधना तप और धर्म प्रचार में समर्पित रहा प्रज्ञासागर महाराज 

  झालरापाटन परम पूजनीय तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर महाराज ने चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज के जन्म दिवस पर उनके जीवन कृतित्व पर प्रकाश डाला। आचार्य श्री ने कहा की आज हम उस दिव्य आत्मा की जयंती बना रहे हैं जिन्होंने जैन धर्म की लुप्त होती श्रमण परंपरा को न केवल पुनर्जीवित किया, बल्कि अपने तप त्याग और साधना से उसे नई ऊर्जा प्रदान की वे थे आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज 

 

 

 

आचार्य श्री ने कहा वह 20वीं सदी के पहले ऐसे दिगंबर आचार्य बने जिन्होंने एक बार फिर भारत की धरती पर दिगंबर साधु परंपरा की ज्योति जलाई उनका संपूर्ण जीवन आत्म साधना, तप और धर्म प्रचार में समर्पित रहा।

 

आचार्य श्री ने उनकी तपस्या एवं उपवास के विषय में बताते हुए कहा कि उन्होंने 25 साल 7 महीने उपवास में बिताए उनके 35 वर्षों के दीक्षा जीवन में उन्होंने लगभग 26वर्ष उपवास में बिताए। यह कोई साधारण तप नहीं है बल्कि चरम संयम और आत्मबल का प्रतीक है। इतने लंबे समय तक निरंतर उपवास करना आज भी साधु परंपरा में अद्वितीय माना जाता है।

 

शास्त्रों की रक्षा के लिए ताम्रपत्रों का उपयोग उन्होंने शास्त्रों को नष्ट होने से बचाने के लिए उन्हें ताम्रपत्रों पर खुदवाया, ताकि आने वाली पीढ़िया भी जैन धर्म का सच्चा ज्ञान प्राप्त कर सके। यह दूरदर्शिता उनकी गहरी धार्मिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 

 

 

आचार्य श्री ने कहा कि मंदिर की शुद्धता के लिए सतत संघर्ष में केवल साधना तक सीमित नहीं रहे बल्कि उन्होंने मंदिरों की पवित्रता और शुद्धता बनाए रखने के लिए वर्षों तक आंदोलन किया। उन्होंने शासन के विरुद्ध भी आवाज उठाई, जब धर्म और संस्कृति के साथ समझौता हो रहा था।

        प्रभाव और प्रेरणा का स्रोत

आचार्य श्री ने कहा कि उनके प्रभाव से ही आज हमें दिगंबर मुनियों की परंपरा फिर से देखने को मिलती है वह अनगिनत लोगों के लिए श्रद्धा, प्रेरणा और आत्मबल का जीवंत उदाहरण है।  उन्होंने यह भी कहा कि आज उनकी जयंती पर आइए हम सब गुरु आस्था परिवार की ओर से उन्हें सच्चे हृदय से श्रद्धांजलि अर्पित करें और संकल्प ले की हम उनके बताएं मार्ग अहिंसा, सत्य, संयम और आत्म साधना को अपने जीवन में अपनाएंगे। भक्तों ने आचार्य श्री की 153 वी जन्म जयंती पर 153 दीपको से महाराज श्री की आरती की। 

         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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