जॉर्जिया में फंसे राजस्थान के 61 पर्यटकों में जैसलमेर के भाविक भाटिया का परिवार भी शामिल, सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील तेज.

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जॉर्जिया में फंसे राजस्थान के 61 पर्यटकों में जैसलमेर के भाविक भाटिया का परिवार भी शामिल, सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील तेज.

जैसलमेर: ईरान और इजरायल के बीच गहराते तनाव का असर अब विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों पर भी दिखने लगा है. ताजा मामला जॉर्जिया से जुड़ा है, जहां राजस्थान के कुल 61 नागरिक इस समय फंसे हुए हैं. इनमें जैसलमेर से चार्टर्ड अकाउंटेंट भाविक भाटिया, उनकी पत्नी साक्षी और पांच साल का बेटा कियांश भी शामिल हैं. भाविक का परिवार इस वक्त जैसलमेर में बेहद चिंतित है और उनकी सलामती की लगातार दुआ कर रहा है.

 

 

 

 

तनाव के चलते उड़ानों पर असर:

भाविक के पिता प्रमोद भाटिया ने जानकारी दी कि राजस्थान टैक्स कंसलटेंट संगठन के बैनर तले यह पूरा दल 8 जून को जॉर्जिया टूर पर रवाना हुआ था. इस ग्रुप में 29 कपल और तीन छोटे बच्चों समेत कुल 61 लोग शामिल हैं. संगठन के अध्यक्ष रतन गोयल खुद इस यात्रा का नेतृत्व कर रहे थे. यात्रा की शुरुआत बेहद सामान्य थी, सभी पर्यटक छुट्टियों का आनंद ले रहे थे, लेकिन जैसे ही पश्चिम एशिया में ईरान-इजरायल तनाव बढ़ा, कई एयरलाइनों ने अपनी उड़ानें या तो रद्द कर दीं या फिर डायवर्ट कर दिया. इस बदले हुए हालात के चलते जॉर्जिया पहुंचा यह भारतीय दल वहीं फंसकर रह गया है. उड़ानों की आवाजाही रुकने से इनकी वापसी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं

 

जैसलमेर की परिवार की सरकार से गुहार:जैसलमेर निवासी भाविक भाटिया शहर के जाने-माने सीए हैं. उनके पिता प्रमोद भाटिया ने मीडिया से बातचीत में चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उनका परिवार लगातार संपर्क में है, लेकिन हालात को देखते हुए डर गहराता जा रहा है. उन्होंने राज्य सरकार और केंद्र सरकार से अपील की है कि तुरंत हस्तक्षेप कर इन नागरिकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए. प्रमोद भाटिया का कहना है कि ऐसे हालात में केवल हौसले से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार की ठोस मदद ही इन परिवारों को राहत दे सकती है.

 

तीन मासूम बच्चों की मौजूदगी ने चिंता और बढ़ाई:प्रमोद भाटिया ने बताया किफंसे हुए इस ग्रुप में तीन छोटे बच्चे भी हैं, जिनमें जैसलमेर का मासूम कियांश भी शामिल है. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में बच्चों की मौजूदगी ने परिजनों की चिंता को और भी बढ़ा दिया है. वे पल-पल टीवी और मोबाइल स्क्रीन से चिपके बैठे हैं, बस इस उम्मीद में कि कब सरकार राहत का कोई कदम उठाए.

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