“पिता – जीवन की जड़, संत–आत्मा की दिशा पूज्य सागर महाराज सनावद:– आज पिता दिवस के इस अवसर पर हम उस महान अस्तित्व को नमन करते हैं, जिसने हमें न सिर्फ जन्म दिया, बल्कि जीवन के हर मोड़ पर संस्कार, अनुशासन और आत्मबल की सौगात भी दी।
सन्मति जैन काका ने बताया की नगर में विराजमान अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज ने फादर्स डे पर बड़े मंदिर जी के हॉल में अपनी अमृत वाणी का रसपान करवाते हुवे कहा की पिता, केवल एक रिश्ता नहीं, वह भाव है जो मूक रहकर भी बहुत कुछ सिखा जाता है।


पिता वो आधार हैं, जो हमें संघर्षों में डगमगाने नहीं देते।वे हमारे पहले संस्कारदाता होते हैं — जो धर्म, कर्तव्य और चरित्र की नींव घर में ही रख देते हैं।लेकिन साथ ही, हम जिन जैन संतों के चरणों में बैठकर आत्मज्ञान प्राप्त करते हैं, वे भी पिता तुल्य ही हैं।जैसे लौकिक पिता हमें दुनियावी दिशा देते हैं, वैसे ही संत हमें आत्मिक दिशा प्रदान करते हैं।वे हमारे मोहरूपी अंधकार को ज्ञान के दीप से दूर करते हैं।

आइए, आज के इस पावन दिन पर हम दो संकल्प लें —अपने पिता के दिए संस्कारों और जीवनमूल्यों का आदर करेंगे। और जैन संतों को आत्मिक पिता मानते हुए उनके बताए मोक्षमार्ग पर चलने का प्रयास करेंगे।पिता से जीवन मिला है, और संत से जीवन का अर्थ!दोनों ही हमारे लिए पूज्य, वंदनीय और प्रेरणास्रोत हैं।
इस अवसर पर प्रशांत जैन,अभिजीत जैन सुनील जैन,सरल जटाले, हेमंत काका, अभियांशु,वीरेंद्र बाबा,पवन धनोते,महिमा जैन, गवाक्षी जैन, कर्णिका जैन, प्रीति जटाले, ऋतु जैन ,प्रियंका पंचोलिया, अंशुमा जैन,नीतू जैन, हीरामणी भूच, सहित अनेक समाजजन उपस्थित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

