*जैन श्रावक श्राविकाओं की भक्ति से महक उठे जिनालय शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में हुआ प्रतिमाओं का परिमार्जन
(कामां डीग)
वर्तमान में जैन धर्म के सबसे बड़े पर्व दसलक्षण महापर्व चल रहे हैं जिससे जैन जिनालयों में श्रावक श्राविकाओं द्वारा प्रातः से ही दर्शन, अभिषेक ,शांतिधारा, पूजन भजन के कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। जिससे सभी जैन मंदिरों में रौनक दिखाई दे रही है। जैन श्रावक श्राविकाओं के भक्ति भाव से ऐसा लगता है कि जिनालय भक्ति से महक उठे हैं।
मन्दिर समिति के कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन बड़जात्या ने बताया कि दसलक्षण पर्व के तीसरे दिवस भाद्र पद शुक्ल सप्तमी को उत्तम आर्जव धर्म की विशेष पूजा आराधना की गई। तो इस अवसर पर रिंकू भैया न कहा कि छल कपट व मायाचार से अर्जित धन से कुछ दिन का वैभव तो प्राप्त कर सकते हो किन्तु कर्मो की
विराधना नही कर सकते। बेईमान व्यक्ति का परिवार, समाज, नगर में यथोचित यश गान,मान सम्मान भी नहीं होता है और उसका दंश उसे हर समय सालता रहता है।अतः नीति नियम के अनुसार मायाचार रहित जीवन व्यतीत करना ही उत्तम आर्जव है। मंदिर समिति के महामंत्री संजय जैन बड़जात्या ने बताया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी मंदिर के पुजारियों द्वारा बुधवार को अष्टधातु की प्रतिमाओं का परिमार्जन किया गया। इस अवसर पर अजय जैन,इंदु जैन,अरिहंत,नीरज,विवेक,सचिन, नरेंद्र,राजेन्द्र,देवेंद्र,बिट्टू
बड़जात्या,ज्ञानचंद,गौरव,श्रीपाल,पवन,अनिल,मुनेश,दौलत जैन सहित अन्य पुजारी गण उपस्थित रहे।
