गलती स्वीकार करना इंसान का सबसे बड़ा गुण: मुनिश्री आदित्य सागर महाराज
जजावर कस्बे में आदित्य सागर महाराज का मंगलवार सुबह मंगल प्रवेश हुआ। भक्तों ने बैंडबाजे के साथ मुनिश्री ससंघ अगवानी की।उन्हें जय जयकार करते हुए पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया दोपहर तीन बजे आदित्य सागर महाराज ने अपने प्रवचन देते हुए कहा कि अपनी गलती को स्वीकार करना ही इंसान का सबसे बड़ा गुण माना जाता है। गलती स्वीकारने पर गलती करने वाले व्यक्ति के मन को भी शांति मिलती है और वह हमेशा खुश रहता है।
महाराज श्री ने कहा व्यक्ति अपने लिए सबसे मंहगे सामान जरूरत की चीजें खरीदना पसंद करता है और भगवान के लिए सस्ती चीज या चढ़ाने की सामग्री से ही काम चलाना चाहता है। व्यक्ति स्वयं के रोजमर्रा के लिए तो महंगे दामों वाली चीजें लाता है, लेकिन भगवान के लिए सस्ती सामग्री का उपयोग करता है। यह ईश्वर के प्रति हमारी आस्था को दर्शाता है।


दिखावे की भक्ति बंद हो, मन से आराधना करें
मुनिश्री ने भगवान की भक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि जितनी भक्ति करें, उतनी ही कम है। इसलिए व्यक्ति को भक्ति में पूरी तरह से मन में रमाना चाहिए, जो व्यक्ति भक्ति करता है तो उसका फल उसको भविष्य में कभी ना कभी तो मिलता है। आप भक्ति कर रहे हैं और कुछ पॉजिटिवसंकेत मिल रहे हैं तो समझो कि ईश्वर आपकी भक्ति से प्रसन्न हैं। महाराज श्री ने कहा कि कई लोग ऐसे होते हैं जो दिखाने के लिए भक्ति करते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए। हमेशा विश्वास व श्रद्धा के साथ भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भक्ति करते समय मनुष्य अगर भाव व मन से भक्ति करता है तो उसको उसका फल जरूर मिलता है। संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



