दो महान आचार्यों के ऐतिहासिक महा मिलन के साथ धर्म तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव का हुआ आगाज
मैं यहां आग्रह पर नहीं अपने भाई की प्रेम भरी पुकार पर आया हूं सारस्वताचार्य देवनंदी गुरुदेव
कचनेर
कचनेर के समीप बने धर्म तीर्थ का महा पंचकल्याणक महोत्सव का आगाज हो गया 16 से 24 फरवरी तक होने वाले इस आयोजन में प्रथम दिन ऐतिहासिक हो गया जब दो महान आचार्यों का मिलन इस पावन धरा पर हुआ जब यह मिलन देखने को मिला तो गुप्तिनंदी जी गुरुदेव देवनंदी जी गुरुदेव के चरणों में नतमस्तक हो गए।
मानो ऐसा लगा कि भरत श्री राम के चरणों में है ऐसी ऐतिहासिक अगवानी देवनंदी गुरुदेव की हुई वह अपने आप में एक स्वर्णिम अध्याय को जन्म दे गई।

जब गुप्तिनंदी जी गुरुदेव आचार्य श्री के चरणो में नतमस्तक हुए तब आचार्य भगवंत ने उन्हें गले से लगा लिया हर कोई क्षण को देख भाव विभोर सा हो गया। जब मंच पर बोलते हुए देवनंदी जी गुरुदेव ने अपना उद्बोधन दिया तो उन्होंने कहा कि हमारे गुरु भाई गुप्ति नंदी कह रहे थे कि गुरुदेव ने हमारे आग्रह को स्वीकार कर यहां आए। लेकिन ऐसा नहीं है मैं तो प्रेम भरी पुकार प्रेम भरी आवाज पर यहां आया हूं यह मेरा कर्तव्य है उन्होंने गुरु भाई को भरत कहकर संबोधित करते हुए कहा कि यह महामिलन नहीं है यह भरत की पुकार पर राम का महामिलन है आज भरत ने राम को अनुभूत कर दिया।

उन्होंने गुप्तिनंदी जी गुरुदेव की जमकर तारीफ की उन्होंने सभी को जीता है जीतने का मतलब यह नहीं की लड़ाई जीती है।
उन्होंने सभी का दिल जीता है।


इस तीर्थ का उन्होंने कायाकल्प कर स्वर्ग बना दिया है उन्होंने कहा पहले हमें तीर्थ को देखा करते थे तो यह बंजर भूमि थी यहां पीने को पानी तक नहीं था यह सब कुछ इन्होंने कर दिखाया है। हमारी नंदी परंपरा में यह ऐसे शिष्य है जिन्होंने आचार्य कनक नंदी और कुंथु सागर महाराज की चरण पादुका के साथ अपनी साधना कर रहे हैं। महावीर की देशना को अगर जन जन तक किसी ने पहुंचाया है तो यह वह है। यह आपके लिए महत्वपूर्ण अवसर आया है।

पूज्य आचार्य गुप्तिनदी गुरुदेव के मार्गदर्शन में पंचकल्याणक महोत्सव शुरू हो गया जिसमें सर्वप्रथम शुद्धि घटयात्रा ध्वजारोहण की क्रिया संपन्न हुई।
संपन्न हुई।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंज मंडी की रिपोर्ट
