तेरी छत्रछाया भगवन मेरे सिर पर हो इस भावना के साथ 80 वर्षीय जगतपुरा जयपुर निवासी पदम कुमार पाटनी का मरण आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के चरणों में हुआ
महुआ
तेरी छत्रछाया भगवन मेरे सिर पर हो
मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे दर पर हो मरण समय गुरु चरण मूल हो संत समूह रहे जिनालयों में जिनवाणी की गंगा नित्य बहे मेरा अंतिम मरण समाधि तेरे दर पर हो समाधि भावना की इन पंक्तियों को बहुत ही बिरले भव्य पुण्य शाली जीव अपने जीवन में चरितार्थ करते हैं ऐसा ही एक अनुकरणीय दृश्य देखने में आया जब जयपुर निवासी 80 वर्षीय पदम कुमार पाटनी जगतपुरा ने यह भावना भाई कि मुझे पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के पास ले जाओ मेरा अंतिम मरण उनके श्री मुख से जिनवाणी सुनते हुए हो ,उनकी इस उत्कृष्ट भावना प्यासा भक्त कुएं रूपी गुरु के जयपुर से महुआ आया जब प्यासा कुएं के पास आया तो आचार्य श्री रूपी कुआं भी भक्त रूपी प्यासे के पास चलकर गए और उन्हें जिनवाणी का रसपान कराया उन्हें धर्म की देशना दी और चारों प्रकार के आहार और परिग्रह का त्याग कराया और आचार्य श्री संघ के 36 साधुओं के सानिध्य में अरिहंत सिद्ध धर्म देशना सुनते हुए उनका उत्कृष्ट मरण हुआ। जयपुर का पाटनी परिवार विगत 30 से अधिक वर्षों से आचार्य श्री से जुड़े है ।स्वर्गीय पाटनी का अंतिम संस्कार महुआ नगर में हुआ।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
