प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज 70वां समाधि वर्ष भक्ति भाव से पूजन कर आचार्य श्री के सानिध्य में मनाया गया
टोंक वात्सल्य वारिधि पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 34 साधुओं सहित अतिशय क्षेत्र टोंक में 34 साधुओं सहित विराजित है।वर्षायोग समिति एवं जैन समाज द्वारा आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज का 70 वा समाधि वर्ष,आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का 76 वा वर्ष वर्धन अवतरण दिवस पर,समाधिस्थ मुनि श्री चिन्मय सागर जी की भावांजलि सभा आयोजित हुई। आचार्य श्री शांतिसागर जी के अंतर विलय समाधि वर्ष एवं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के जन्म दिवस पर विभिन्न द्रव्यों से भक्ति सहितपूजन की गई इस अवसर पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी के गुणानुवाद भावांजलि में बताया कि 18 सितंबर 1955 को 36 दिन की सल्लेखना के बाद आपकी समाधि हुई। आचार्य श्री ने 9 के अखंड अक्षय अंक का आचार्य श्री शांति सागर जी से संयोग बताया कि दिनांक 18 का योग 9,सितम्बर माह का क्रमांक 9,जन्म दिनांक 27 का योग 9, आपने 36 दिन की संलेखना ली 36 का योग 9 यह अंक अध्यात्म का प्रतीक हैं राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे मुनि श्री चिन्मय सागर जी के बारे में बताया कि दीक्षा गुरु ने नाम सोच कर चिन्मय रखा जो चेतना , चिंतन का प्रतीक हैं।क्षपक साधु की उत्कृष्ट समाधि मरण होने कमसे कम दो भव ओर अधिकतम 8 भव जन्म में मोक्ष जाते है। आप लोग बच्चो के नाम ऊटपटांग रखने के बजाय नन्हें बालक बालिकाओं के नाम तीर्थंकर आचार्य मुनियों महापुरुषों के नाम पर रखना चाहिए। नाम का जीवन पर गहरा प्रभाव होता हैं वर्ष 1989 में दीक्षा के बाद गुरु से वियोग वर्ष 1990 में होने पर भी दीक्षा गुरु के आदेश , संकेत का पालन कर हमारे संघ में पूर्ण समर्पण और गुरु भक्ति से 35 वर्ष साथ रहे। आचार्य श्री की भावांजलि के पूर्व राजेश पंचोलिया इंदौर,विनोद,विपुल पारसोला , प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख, ओमप्रकाश भौरावत,आर्यिका श्री पद्मयश मति श्री महायशमति, श्री देशनामति, श्री निर्मुक्तमति, श्री विलोक मति, श्री वत्सलमति श्री श्री चैत्यमति श्री शुभमति मुनि प्रणीतसागरजी, मुमुक्षुसागर जी, प्रबुद्ध सागरजी, चिंतन सागर जी , ने आचार्य श्री शांति सागर जी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं मुनि श्री चिन्मय सागर जी का गुणानुवाद कर उनकी गुरुभक्ति समयबद्धता, अनुशासन, समर्पण के बारे में बताया ।सभी साधुओं ने दीक्षागुरु आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी द्वारा विगत वर्षों में कराई उत्कृष्ट समाधि मरण को स्मरण किया। मुनि श्री हितेंद्र सागरजी ने समाज के युवाओ द्वारा प्रतिदिन मुनि श्री चिन्मय सागर जी को अभिषेक दिखाने ओर विधान करने की प्रशंसा की ।समाज प्रवक्ता पवन कंटान विकास जागीरदार अनुसार आचार्य श्री शांति सागर जी एवं पूर्व आचार्यो के चित्र का अनावरण एवं आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट करने का सौभाग्य शिखरचंद घाटलिया उदयपुर, ब्रह्मचारी गज्जू भैया ,ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी राजेश पंचोलिया इंदौर सोनू जैन भिंडर, आदि को प्राप्त हुआ।माइक संचालन कमल सराफ ने किया। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
