गृहस्थ से ही श्रावक बनता है :- आर्यिका विभा श्री माताजी

मुनि गुणसागर के समाधि दिवस पर गुणस्थली पहुंचे सैकडों श्रद्धालु
निवाई : सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी के सानिध्य में सन्त निवास नसियां जैन मंदिर में समाधिस्थ जैन मुनि गुणसागर महाराज का समाधि दिवस मनाया। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला व राकेश संधी ने बताया कि मुनि गुणसागर महाराज के समाधि दिवस पर श्रद्धालुओं ने मूलनायक भगवान शांतिनाथ के कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करके पूजा अर्चना की इस दौरान सेकडों श्रद्धालुओं ने गुणस्थली पर जोरशोर से समाधि दिवस मनाया। इस अवसर पर जौंला व संधी ने बताया कि गणिनी आर्यिका विभा श्री माताजी सन्त निवास पर धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि जिसके पास धर्म ध्यान आदि क्रियायें करने के लिए समय न हो वह गृहस्थ है। गृहस्थ गलत कार्यो को भी आनंद पूर्वक करता है और जिस दिन उसे गलत कार्यो में आनंद नहीं आयेगा वह श्रावक बन जाएगा। उसे खेद इसलिए नहीं क्योंकि भेद नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार गृहस्थ की तीन चीज है उसी प्रकार श्रावक की भी तीन चीज है जो श्रद्धालु है वह श्रावक है। माताजी ने कहा कि गृहस्थ से ही श्रावक बनता है और श्रावक से ही साधू। बिना श्रद्धा के कुछ भी कार्य नही होता चाहे वह कार्य मिथ्यादृष्टि का हो या सम्यग्दृष्टि का। श्रद्धा दोनों में आवश्यक है श्रावक की सम्यक श्रद्धा है और गृहस्थ की विवेक शुन्य श्रद्धा है। आर्यिका विनय श्री माताजी ने कहा कि कर्म ही प्रदान है आज सारे देश में धर्म के नाम पर विवाद हो रहे हैं पार्टिया बन रही है , सम्प्रदाय बन रहे हैं , ओर जो धर्म के नाम पर लड़ते हैं उन्होंने धर्म के स्वरुप को नहीं समझा है। उन्होंने कहा कि धर्म लड़ना नहीं तरना सिखाता है उभरना सिखाता है। जो एक दूसरे के मन से मन मिला दे वह लोकाचार की अपेक्षा धर्म है। अध्यात्म की अपेक्षा आत्मा की पवित्रता धर्म है। विनय श्री माताजी ने कहा कि राग द्वेष छल कपट से रहित आत्मा की सरल परणति धर्म हैं।इससे विपरीत आचरण अधर्म है। जैन समाज के प्रवक्ता विमल जौंला व राकेश संधी ने बताया कि धर्म सभा के पश्चात सकल दिगम्बर जैंन समाज के श्रद्धालुओं ने शीतकालीन प्रवास हेतु आर्यिका संध को श्री फल चढा़या। एवं संधस्थ आर्यिका माताजी के अनुसार गुरुमाता के समक्ष पूजा अर्चना कर अर्ध्य चढा़कर जिनवाणी स्तुति की। जौंला ने बताया कि दोपहर में शंका समाधान के पश्चात गुरुभक्ति आरती एवं आनन्द यात्रा का आयोजन किया गया जिसमें श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमडी

