दृष्टि बदलोगे तो सृष्टि बदल जावेगी संन्यासी प्रहार को भी उपहार बना देता है और संसारी उपहार को भी प्रहार बना देता है आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी

धर्म

दृष्टि बदलोगे तो सृष्टि बदल जावेगी संन्यासी प्रहार को भी उपहार बना देता है और संसारी उपहार को भी प्रहार बना देता है आर्यिका श्री सृष्टि भूषण माताजी
सीहोर
परम पूजनीय आर्यिका श्री 105सृष्टिभूषण माताजी का मंगल वर्षा योग 2025 भोपाल में होने जा रहा है माताजी ने सीहोर दिगंबर जैन मंदिर में अपनी वाणी से कृतार्थ करते हुए कहा कि आज का इंसान सोचता है कि हम पूजा कर ले, भगवान का नाम ले ले, राम का नाम ले ले,अल्लाह का नाम ले ले, महावीराय नमःकह ले हमारे पाप नष्ट हो जाएंगे ऐसा नहीं होता।

 

उन्होंने कहा कि शब्दों की बातों से पेट नहीं भर सकता तो परमात्मा का नाम लेने से कैसे पेट भर सकता है माना कि परमात्मा के बिना मोक्ष नहीं मिलता लेकिन मात्र नाम लेने से ही मोक्ष नहीं मिलता।

माताजी ने श्रद्धा के विषय में कहा कि श्रद्धा वह होती है जो महापुरुषों के प्रति होती है एक बार अगर श्रद्धा हो जाए तो वह छूट नहीं सकता हमें जो परमात्मा देता है उसे हम पहचान नहीं पाते स्वर्ग और नरक हमारे जीवन शैली में है यदि हम क्रोध में हैं, छल में है कपट में है लोगों को गिराने में है तो वही नर्क है हम नरको की कल्पना करते हैं। ऐसी बातें करके हम अधोपतन की ओर बढ़ते हैं हम स्वर्गो की बात क्यों नहीं करते।

यह हमारा देखने का ढंग है कि हम क्या देखते हैं परमात्मा की कृपा तो सब पर होती है। फूल की तरह महकना चाहिए। सन्यासी और संसारी के विषय में बताते हुए माताजी ने कहा कि सन्यासी प्रहार को भी उपहार बना देते हैं और संसारी उपहार को भी प्रहार बना देते हैं क्योंकि संसारी की नजर में गलत चीज हैं उसका नजरिया गलत की ओर है उसके अंदर होठों में हसी और अंदर में ज्वाला है संसारी व्यक्ति लोगों को गिराने में लगे रहते हैं। यदि संसारी अपनी उर्जा दूसरों को उठाने में लगा देगा तो यह जीवन परमात्मा बन जाएगा।

 

 

माताजी ने कहा लौकिक जीवन में चाहे नाई हो, धोबी, ड्राइवर,वकील डॉक्टर सब पर विश्वास करते हैं किंतु भगवान पर विश्वास श्रद्धा नहीं करते हैं श्रद्धा से ही हमें पुण्य की प्राप्ति होती है हमें नेगेटिव नकारात्मक के बजाय पॉजिटिव सकारात्मक सोच चिंतन रखना चाहिए। दोष हमारे दृष्टिकोण में है अच्छा या बुरा काटा या फूल दुआ या बद्दुआ हमारे विचारों में है दृष्टि बदलोगे तो सृष्टि बदल जावेगी प्रकृति की सुंदरता को सहेजना चाहिए फुल प्रेम स्नेह का प्रतीक है।

 

भक्ति के लिए फूल कली और भगवान के लिए इत्र हो जाता है फूलों की तरह जीवन को सुगंधित बनने जीवन को मधुबन बनावे

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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