सब्र का फल बहुत मीठा होता है बहुत प्रतीक्षा के बाद वर्षों के पुण्य से साधु समागम कठिनता से प्राप्त होता है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज

धर्म

सब्र का फल बहुत मीठा होता है बहुत प्रतीक्षा के बाद वर्षों के पुण्य से साधु समागम कठिनता से प्राप्त होता है आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज
बिजोलिया पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित बिजौलिया विराजित है सकल दिगम्बर जैन समाज निवाई राजस्थान के पदाधिकारियों सहित श्री दिगम्बर जैन बडा मन्दिर कमेटी व अन्य जिनालयों के कमेटी के प्रतिनिधि सहित नेमीचन्द गऺगवाल, महावीर पराणा, जितेन्द्र चवरिया, रमेश चन्द गिन्दोडी,गोपाल ,सुरेश,पाटनी, अरुण लटुरिया अमित कटारिया हेमंत ,पवन ,जय जैन एव नगर के महिला ,युवा मंडल सहित सांकेतिक 200 से अधिक श्रद्धालु 25 छोटे वाहन बसों से आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को वर्ष 2025 का चातुर्मास निवाई किए जाने के निवेदन के साथ उपस्थित हुए । इस बेला में आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर महाराज ने कहा कि सब्र का फल मीठा होता है ,बहुत प्रतीक्षा के बाद वर्षों के पुण्य से साधु समागम कठिनता से प्राप्त होता है आप चातुर्मास का निवेदन करने आए है संघ का विहार बिजौलिया से चवलेश्वर क्षेत्र जहाजपुर की ओर होगा ।जैन कर्म प्रधान धर्म हे सभी नगर चातुर्मास के लिए पुरुषार्थ कर रहे है।हमारे कर्म जैसे होगे वैसे ही हमें फल मिलता हे। शुभ कार्य से पुण्य का उदय होता है। चातुर्मास स्थल का निर्णय विचार कर करेंगे यह मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने निवाई सहित सभी भक्तों की आयोजित बिजौलिया की धर्म सभा में अपनी देशना में प्रकट की । राजेश पंचोलिया ने बताया कि आचार्य श्री ने अपने देशना में आगे बताया कि मनुष्यगति , त्रियंच ,देवगति को धर्म देशना सुनने का सौभाग्य मिलता है। मनुष्य जन्म और उसमें भी उच्च कुल असीम पुण्य से प्राप्त होता है ।हमारे भगवान सर्वज्ञ वीतरागी और हितोपदेशी हैं ।उनकी वाणी मंगलमय होती है इनकी शरण मंगलकारी होती है आचार्य श्री ने बताया कि रत्नत्रय दिव्य देशना वह नौका है जिससे इस किनारे से उस किनारे हम रत्नत्रय धारण कर सिद्धालय को प्राप्त सकते हैं इसलिए धर्म को समझने का प्रयास कर अपने मानव जीवन को सार्थक करने का प्रयास सभी को करना चाहिए
राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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