हम भारत वासी सागर में ही खुश महासागर नहीं चाहिए मेरे पास तो प्रसन्न सागर : शैलेश

धर्म

हम भारत वासी सागर में ही खुश
महासागर नहीं चाहिए मेरे पास तो प्रसन्न सागर : शैलेश

पारसनाथ
पारसनाथ मधुबन सम्मेदशिखरजी में हो रहे पंचकल्याणक पंचकल्याणक महामहोत्सव के अवसर पर भव्यपंडाल के मंच पर सोमवार देर रात तक टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा से करोड़ों दिलों में जगह बनाने वाले कवि शैलेश लोढ़ा ने कविता पाठ से देर रात तक समां बांधे रखा। वहींअजात शत्रु मोनिका देहलवी गौरव चौहान ने भी कविता के माध्यम से लोगों का खूब मनोरंजन किया।

 

 

 

 

मंच विराजमान आचार्य भगवंत प्रसन्नसागर महाराज के चरण वंदना करते हुए शैलेश ने कहा कि आज
गुरुदेव हमने जो पाया है वह अमूल्य है।इतनी कठिन साधना के बावजूद मेरे लिए मंच परआपका विराजमान होना मेरे लिए इससे बड़ा सौभाग्य कुछ नहीं हो सकता है।

शैलेश ने बताया कि व भी जैन परिवार से हैं। वहीं एक कविता के माध्यम से कहाकि दुनियां से हमने कहा कि किसी के पास हिंद महासागर है तो किसी के पास प्रशांत महासागर पर मेरे
पास तो प्रसन्न सागर हैं। हम भारत केवासी सागर में ही खुश हैं,
महासागर नहीं चाहिए।

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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