श्रुत पंचमी” का दिन हमारी संस्कृति का श्रेष्ठतम दिन है टेक्नोलॉजी का सही उपयोग कर अपने ज्ञान को बढ़ाईए”प्रमाण सागर महाराज

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श्रुत पंचमी” का दिन हमारी संस्कृति का श्रेष्ठतम दिन है टेक्नोलॉजी का सही उपयोग कर अपने ज्ञान को बढ़ाईए”प्रमाण सागर महाराज
भोपाल
श्रुत पंचमी” का दिन हमारी संस्कृति का श्रेष्ठतम दिन है टेक्नोलॉजी का सही उपयोग कर अपने ज्ञान को बढ़ाईए” उपरोक्त उदगार मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने अवधपुरी में आचार्य विद्यासागर संस्थान में व्यक्त किये।

 

 

 

उन्होंने कहा कि जो ज्ञान परंपराचार्य से आचार्य धरसेन स्वामी ने प्राप्त किया और इस तत्व ज्ञान को यदि आचार्य भूतबली और आचार्य पुष्प दंत के माध्यम से हमे नहीं दिया होता तो क्या यह तत्व ज्ञान षठखंडागम के रुप में हमारे सामने आता?”
मुनि श्री ने कहा कि आचार्य भूतबली एवं आचार्य पुष्पदंत ने षठखंडागम को जिस दिन लिपीबद्ध कर पूर्ण किया वह तिथी ज्येष्ठ सुदी पंचमी थी इसे देवों ने उत्सव के रुप में मनाया और हम लोग भी आज इसे उत्सव के रुप में ही मना रहे है।

 

मुनि श्री ने कहा कि इसी मूल ग्रंथ के आधार पर अन्य आचार्यों ने आगे ग्रंथों की रचनायें की जिसमें आचार्य कुंद कुंद हुये जिन्होंने कहा कि “आगम चक्खु साहु” जिन्होंने हमें समयसार, प्रवचनसार, पंचास्तिकाय, नियमसार,अष्टपाहुण जैसे अनेक महान ग्रंथ दिये जिससे आज पूरे जगत को तत्वज्ञान प्राप्त हो रहा है। मुनि श्री ने कहा कि पूर्वाचार्यों का यह उपकार हम सभी पर है यह तो भगवान ने जो कुछ भी बोला उसका यह बहुत थोड़ा सा ही अंश है और उसे ही हम लोग पढ़ पाते है और समझ पाते है। जैसे किसी बड़े बर्फ की सिल्ली को हजारों हाथों से गुजरने के पश्चात बहुत छोटा सा अंश ही हमारे हाथ लगता है उसी प्रकार भगवान महावीर की वाणी से निकला हुआ वह अंश बहुत छोटे से अंश में ही हमारे पास लग पाया है मुनि श्री ने भगवान महावीर के निर्वाण के उपरांत गौतमस्वामी हुये उसके पश्चात सुधर्माचार्य,जम्बू स्वामी तथा तीन केवली भगवान के संपूर्ण संरक्षण में श्रमणसंघ फला फूला इसके पश्चात विष्णु,नंदीमित्र, अपराजित,गोवर्धन, भद्रबाहु सहित पांच श्रुत केवली हुये।

 


इन पांच श्रुतकेवली के शासनकाल में जिनशासन की यह परंपरा चलती रही लगभग 163 वर्षों का काल इनका रहा धीरे धीरे पांच सौ वर्ष बीत गये और जिनवाणी का ज्ञान क्षींण होता गया तो अंत में आचार्य धरसेन ने विचार किया कि यदि इसी प्रकार जिनवाणी का ज्ञान क्षींण होता रहा तो आने वाली पीढ़ी का क्या होगा और उन्होंने यह ज्ञान आचार्य पुष्पदंत और आचार्य भूतबली को सोंपा जो कि उन्होंने लिपीबद्ध किया वह हमारे लिये बर्फ की सिल्ली से निकली छोटी छिपट है यदी इस अंश को भी हमने अपनी आत्मा के उद्धार में लगा लिया और उन शास्त्रों को पढ़ लिया और समझ लिया तो श्रुतपंचमी महोत्सव मनाना सार्थक हो जाएगा।आज के दिवस जिनवाणी के प्रति उपासना जगाइये। मुनि श्री ने कहा कि ज्ञान से समाधान मिलता है,और चरम आनंद की अनुभूति स्वाध्याय से होती है।

मुनि श्री ने कहा कि सोशल मीडिया और फालतू के चैनल से अपने समय को बचाइये और स्वाध्याय में लगाइये तन को खुराक न दो तो तन अस्वस्थ होगा लेकिन मन को खुराक न मिली तो मन भृष्ट होगा अस्वस्थ शरीर स्वस्थ हो जाएगा लेकिन मन भृष्ट हो गया तो अनेक जन्म नष्ट हो जाएगे अपने मन को भृष्ट होंने से बचाइये और नियमित स्वाध्याय कीजिये प्रवचन सुनना भी एक स्वाध्याय ही है मुनि श्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी का सही उपयोग कीजिए और प्रमाणिक पाठशाला से जुड़िये जिससे शास्त्रों का पाठ पंडित बनने के लिये नहीं अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिये करें।

आज से पंचकल्याणक महोत्सव प्रारंभ होगा
प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया 1जून से अवधपुरी में पंचकल्याणक महामहोत्सव प्रारंभ होंने जा रहा है जिसमें पाषाण से परमात्मा बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हो जायेगी क्रमशः यह उत्सव भगवान के गर्भ से प्रारंभ होता है तत्पश्चात जन्म तप ज्ञान तथा मोक्ष की समस्त क्रिया ओं के साथ समाप्त होता है शास्त्रानुसार एक एक क्रिया की पूजा तथा उसका नाट्यमंचन द्वारा प्रमुख पात्रों द्वारा मंचन कर दिखाया जाएगा मुनिसंघ के सानिध्य में प्रतिष्ठाचार्य अशोक भैयाजी के निर्दैशन में यह 6 जून तक पूर्ण होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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