आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सानिध्य में पंच कल्याणक सम्पन्न

धर्म

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सानिध्य में पंच कल्याणक सम्पन्न
बिजौलिया

बिजोलिया जिला भीलवाड़ा में वात्सल्य वारिधी पंचम पट्टाधीश आचार्य श्री वर्धमान सागर जी 36 साधुओं सहित विराजित हैं दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर बिजौलिया में विधि नायक श्री आदिनाथ एवं श्री मुनिसुब्रत नाथ भगवान का लघु पंचकल्याणक और विश्व शांति हेतु यज्ञ आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में उत्साह और भक्ति पूर्वक सानंद सम्पन्न हुआ विधि पूर्वक प्रतिष्ठित प्रतिमाएं बड़ा मंदिर में पंडित विशाल ओर पंडित कीर्तिश के निर्देशन में विराजित की गई

इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि समाज में जन्म की, विवाह की सालगिरह उत्सव मनाया जाता है।पंचकल्याणक महामहोत्सव है आप लोग रजत, स्वर्ण ,हीरक ,शताब्दी महोत्सव मनाते हैं इस अतिशय क्षेत्र पर 27 वर्ष पूर्व श्री पार्श्वनाथभगवान का पंचकल्याणक हुआ था अब दूसरी बार श्री आदिनाथभगवान, मुनि सुव्रतनाथ भगवान का पंचकल्याणक हो रहा है पंच कल्याणक को 27 वर्ष हो गए हैं 25 वर्षों में रजत महोत्सवमनाया जाता है। तीर्थंकरों का जन्मपुण्य का अवसर प्रदान करता है।देवता, मनुष्य उत्सव खुशी आनन्द मनाते हैं यहां तक की नरक में भी नारकीय जीव मार काट भूलकर कुछ पल के लिए शांति का अनुभव करते हैं आप लोग बालक का जन्म दिवस बर्थडे मनाते हैं किंतु तीर्थंकर भगवान का जन्म कल्याणक मनाया जाता है।भरत क्षेत्र में पांच कल्याणक तीर्थंकरों के मनाए जाते हैं विदेह कल्याणक बनाने का सौभाग्य देवताओं को ही मिलता है किंतु आप लोग पुण्यशाली जीव हैं जिन्हें पंच कल्याणक में सौधर्म इन्द्र सहित प्रमुख पात्र बनने का सौभाग्य मिलता है। तीर्थंकर बालक जन्म से तीन ज्ञान के धारी होते हैं जन्म की सार्थकता तभी है कि आपका जीवन धर्म सहित होकर लोक कल्याण की भावना करते हैं और वैराग्य संयम धारण कर तप करते हैं।भगवान भी गर्भ में अवतरित होकर जन्म लेकर दीक्षा तप करके केवल ज्ञान प्राप्त कर धर्म देशना देते हैं फिर मोक्ष प्राप्त करते हैं।यह मंगल देशना भगवान के मोक्ष दिवस पर आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने धर्म सभा में प्रकट की राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि पंचकल्याणक की क्रियाएं प्रतिष्ठाचार्य करते हैं किंतु आचार्य और साधु परमेष्टि ही सूरी मंत्र का संस्कार देकर प्रतिमा में भगवान के गुणों का आरोपण करते हैं। इससे प्रतिमा पूज्यता को प्राप्त होती है भगवान के दर्शन से पुण्य की प्राप्ति तभी होती है जब आपका मन निर्मल और एकाग्र हो, भगवान के दर्शन अभिषेक, पूजन स्वाध्याय से कर्मों की निर्जरा होती है। राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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