जिसने समय का सम्मान किया समय ने उसका सम्मान किया प्रसन्न सागर महाराज
अन्तर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज की कुलचाराम से बद्रीनाथ अहिंसा संस्कार पदयात्रा चल रही है आज विहार के दरम्यान उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि उपेक्षा और अपमान यदि अपनों से बार बार मिले..तो शब्दों से वाक युद्ध करना उचित नहीं है..!
समझदारी इसी में है कि वहाँ से दूर हो जाना चाहिए। सब समय का खेल है। कूड़े कचरे के दिन भी बदलते हैं।समय ने किसी को नहीं छोड़ा, क्या राजा – क्या रंक, क्या अमीर – क्या गरीब, क्या सेठ – क्या भिखारी। सबने समय की मार खाई है। *इतिहास को देखो, वर्तमान को महसूस करो और भविष्य को संवारो।
महाराज श्री ने कहा जिसने समय का सम्मान किया, समय ने उसका सम्मान किया। कभी ये मत कहो – हम टाइम पास कर रहे हैं। ये भी मत कहो- समय बोझ है इसे ढो रहे हैं। आप स्वयं सोचो बोझ कौन ढोता है – इन्सान या गधा-?
समय का सम्मान करने वाले वन्दनीय और अभिनन्दनीय हो जाते हैं और उनका यशोगान युगों युगों तक किया जाता है। समय का धैर्य पूर्वक सदुपयोग हमें निखारता है। जैसे – सम्मेद शिखर की यात्रा रात्रि 1 या 2 बजे से चलना शुरू करते हैं। एक एक कदम चलते चलते पारसनाथ टोंक पर पहुंच जाते हैं। समय, साहस और श्रम ने यात्री को लक्ष्य तक पहुँचा दिया। वैसे ही कार्य करते रहो और समय का इन्तजार करो, फल जरूर मिलेगा। हम उजास और उल्लास की गति को तभी पकड़ सकते हैं, जब समय के साथ कदम ताल करेंगे। इसलिए समय के महत्व को समझें और सही दिशा में सही उपयोग करें।समय ही है जो हमारे भविष्य का निर्माता है। समय, श्रम और साहस की त्रिवेणी हमें सफलताओं के शीर्ष पर पहुँचा देती है।

जिन्होंने समय को समझा, समय ने उन्हें समझदार बना दिया।

उन्होंने कहा समय को आदर्श बनाने वाले, समय आने पर समाज एवं राष्ट्र के अनुकरणीय और आदर्श पुरूष बन जाते हैं। समय बोध ही कर्तव्य बोध का पाठ पढ़ाता है। इसलिए अपने दैनिक जीवन की समय सारणी बनायें और समय के सार को पायें। अन्यथा बन्दर के हाथ में समय की छुरी…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

