राग द्वेष मोह कारण कर्मों का आश्रव होकर दुख मिलता हैंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी

बिजौलिया भगवान पारसनाथ की उपसर्ग स्थली बिजौलिया अतिशय क्षेत्र में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में विराजित है।धर्म सभा में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उपदेश में बताया कि भगवान आदिनाथ से लेकर भगवान महावीर स्वामी तक सभी तीर्थंकर हमारे जैसे ही रहे ,उन्होंने भी संसार परिभ्रमण किया उन्होंने भी दुख प्राप्त किए हैं तीर्थंकर बनने के पूर्व उन्होंने जगत के सभी प्राणियों की कल्याण की मंगल भावना करी उसके कारण तीर्थंकर नाम कर्म प्रकृति का बंध किया ।सभी तीर्थंकरों ने उपसर्ग को सहन किया बिजोलिया में भगवान पारसनाथ पर कमठ ने उपसर्ग किया तब धरणेन्द पद्मावती ने उपसर्ग को दूर किया। प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज ने भी अपने जीवन में अनेक उपसर्गों को सहन किया धर्म से उन्होंने उपसर्ग को दूर किया।राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि आप सभी ने अनेक गतियों में घूम कर मनुष्य जीवन पुण्य से प्राप्त किया है ,उसमें भी अधिक पुण्य होने पर आपको जैन कुल मिला ।श्रावक को श्रद्धावान, विवेकवान और क्रियावान होकर धर्म धारण करना चाहिए इससे सिद्ध बनने की राह मिलती है। श्रावकाचार ग्रंथ श्रावक और श्राविकाओं दोनों के लिए है श्रावक धर्म का पालन करना सबका कर्तव्य है भगवान की वाणी शास्त्रों में लिखी है उसका एक अक्षर या संतों के उपदेश की एक शब्द से भी आपका जीवन अच्छा हो सकता है श्रोता में उपदेश सुनने, ग्रहण करने ओर जीवन में धर्म उपदेश उतारने की ललक होना चाहिए जिन्होंने उपदेश से धर्म को धारण किया वह धर्मात्मा से परमात्मा बन गए।

इसके पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि पंच कल्याणक की धार्मिक क्रियाओं से जीवन धन्य होता हैं आत्मा और शरीर भिन्न है यह भेद समझना जरूरी हैबड़े मंदिर के अनिल गोधा,मुकेश ,मनोज ने बताया कि प्रवचन के पूर्व प्रेम कुमार सोनी परिवार ने आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन ओर कैलाश चंद राजेंद्र ने जिनवाणी भेंट की संचालन कमलेश सोनी ने किया।
गुरुवर की प्रातः बेला में ध्वजारोहण प्रमोद सुरेश परिवार रामगंज मंडी तथा पांडाल उद्घाटन नाथूलाल अशोक कोटा परिवार द्वारा किया जाएगा संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
