घट यात्रा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ महोत्सव का आगाज -महिलाएं ही मांगलिक होती है – ब्र. प्रदीप ‘सुयश’

धर्म

घट यात्रा एवं ध्वजारोहण के साथ हुआ महोत्सव का आगाज -महिलाएं ही मांगलिक होती है – ब्र. प्रदीप ‘सुयश’

कोटा, 23 मार्च । किसी भी धार्मिक आयोजन में मांगलिक क्रिया करने का अधिकार केवल महिलाओं को ही दिया गया है क्योंकि जिनागम में कन्याओं को एवं महिलाओं को मंगल एवं शुद्ध माना गया है । कोटा के सबसे प्राचीन जैन मंदिर के पुनर्निर्माण पश्चात आयोजित किए जा रहे श्री मज्जिनेंद्र वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर निर्देशन प्रदान करते हुए बा ब्र. प्रदीप भैया सुयश ने पूजा विधि कराते हुए बताया की पंचकल्याणक या वेदी प्रतिष्ठा जैसे आयोजनों में अष्ट कुमारियों या सौभाग्यवती महिलाओं का विशेष महत्व बताया गया है यहां तक कि जन्म के पश्चात भगवान का प्रथम स्पर्श भी इंद्राणी ही करती है इसलिए महिलाओं को अशुद्ध नहीं मांगलिक माना गया है। 

 

 

 

 

मुख्य संयोजक नवीन जैन दोराया ने जानकारी देते हुए बताया की प्रातः 6 बजे अभिषेक, शांतिधारा क्रिया के पश्चात सर पर कलश रखते हुए महिलाओ द्वारा घट यात्रा निकाली गई जो नेमीश्वर मंदिर से प्रारंभ होकर गढ़ पैलेस के सामने से होकर नव निर्मित जिनालय के प्रांगण में पहुंची जहां श्रेष्ठि स्व. श्री राजेंद्र प्रकाश – श्रीमती रतन बाई कोटिया परिवार द्वारा शुभ लग्न में ध्वजारोहण किया गया । तदोपरांत इसी परिवार द्वारा नवीन जिनालय भवन के पट्ट खोलने का सौभाग्य भी प्राप्त किया गया । सह प्रतिष्ठाचार्य श्री जितेन्द्र शास्त्री के निर्देशन पर सभी महिलाओं ने अपने अपने लाए हुए कलशों के जल से वेदी, शिखर सहित पूरे जिनालय की शुद्धि की । सभी पात्रों का सकलीकरण किया गया एवं भगवान के समक्ष नैमेत्तिक पूजन किया गया । 

सांयकाल महाआरती का आयोजन हुआ । अध्यक्ष प्रकाश मालूजी ने बताया की 24 मई को नवीन भवन में याग मंडल विधान का आयोजन होगा एवं सांयकाल बैंड बाजा, जैन ध्वज एवं बग्गियों में सुशोभित इंद्र परिवार की शोभायात्रा निकाली जायेगी । 25 मई को विश्व शांति हवन के साथ जिनालय के शिखर पर कलशारोहण एवं ध्वजारोहण किया जायेगा। 

 

 

 

 

प्रचार संयोजक राकेश जैन ‘चपलमन’ ने मंदिर इतिहास से जुड़ी जानकारी सांझा करते हुए बताया डॉ. राजेंद्र जैन के संपादकत्व में प्रकाशित बघेरवाल जाति का इतिहास के आधार पर तो इस मंदिर की स्थापना कोटा रियासत की स्थापना से भी पूर्व मानी गई है

 

अर्थात कोटा जैन समाज का सबसे पहला जैन मंदिर होने के साथ ही यहां स्थापित जिन प्रतिमाएं भी अंकित प्रशस्ति के आधार पर 400 से 1200 वर्ष प्राचीन प्रतीत होती है । जो आज भी मंदिर प्रांगण में संरक्षित है जहां समय समय पर इतिहास विषय के शोधार्थी अध्ययन हेतु आते है ।

राकेश जैन ‘चपलमन’9829097464 प्रचार संयोजक : वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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