श्रृत संवेगी महा श्रमण 108श्री आदित्य सागर महाराज ससंघ का पिड़ावा मंगल प्रवेश जीवन में प्रेम और तर्क उतारने के लिए तीन सरल तरीके हैं। अभ्यास, अनुभव और अध्ययन मुनिश्री

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श्रृत संवेगी महा श्रमण 108श्री आदित्य सागर महाराज ससंघ का पिड़ावा मंगल प्रवेश जीवन में प्रेम और तर्क उतारने के लिए तीन सरल तरीके हैं। अभ्यास, अनुभव और अध्ययन मुनिश्री

पिड़ावा:-
परम पूज्य पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर महाराज के परम शिष्य श्रृत संवेगी महाश्रमण 108श्री आदित्य सागर मुनि महाराज, मुनि 108श्री अप्रमित सागर,108श्री सहज सागर, क्षुल्लक श्री 105श्रेयससागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश पिड़ावा नगर में हुआ। जैन समाज प्रवक्ता मुकेश जैन चेलावत ने बताया कि मुनि108 श्री आदित्य सागर महाराज जी के सानिध्य में 19 मई से 25मई 2025 तक मिश्रोली में भव्य पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन के लिए महाराज जी को वहां पहुंचना है इस अवसर पर पिड़ावा नगर को दो दिन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

 

 

 

महाराज श्री इन्दौर से पेदल विहार करते हुवे रविवार को सुसनेर पहुंचे थे। सोमवार को सुसनेर से मंगल विहार करते हुवे पिड़ावा पहुंचे मंगल विहार में समाज बंधु एवं युवा वर्ग महाराज श्री संघ के साथ पेदल विहार में चल रहे हैं नगर की सीमा बाल्दा रोड़ पर स्थित पेट्रोल पम्प पर समाज बंधु के द्वारा भव्य आगवानी की गई वहां पर निलेश जैन चेलावत परिवार द्वारा समाज के बन्धुओं को अल्पहार भी करवाया गया।

 

 

नगर में सन्त के आगमन पर समाज के बन्धु काफी हर्षित थे एवं गदगद थे जय जयकार करते हुवे चल रहे थे गुरूदेव को बेण्ड बाजों के साथ बाल्दा रोड़ से नयापुरा, खांण्डुपुरा, पिपली चौक मौहल्ला,शहर मौहल्ला, सेठान मौहल्ला श्री सांवलिया पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र बड़ा मंदिर लाया गया जहां पर परम पूज्य 108 श्री भूतबलि सागर महाराज के शिष्य परम पूज्य 108 श्री मौन सागर, मुनि सागर, मुक्ति सागर महाराज जी की ग्रीष्मकालीन धर्म देशना चल रही है वहां मंगल मिलन हुआ उसके बाद दर्शन करने के पश्चात सभी सन्त श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन जुना मन्दिर नवीन जिनालय खांण्डुपुरा पहुंचे जहां पर श्री मुनि सागर,व आदित्य सागर महाराज जी के प्रवचन हुवे ।

आदित्य सागर महाराज को 16 भाषाओं का ज्ञान है

आपको बता दे आदित्य सागर महाराज ऐसे सन्त है जिन्हे हिंदी, आंग्ल,कन्नड़, हाड़े कन्नड़, संस्कृत, प्राकृत ,अपभंश,तमिल, तरु, ब्राह्मी लिपि आदि 16 भाषाओ का ज्ञान है।और इनके द्वारा रचित साहित्य सृजन, साहित्य श्रम 100से ज्यादा शास्त्र प्रकाशित है ।


ऐसे सन्त ने अपने मंगलमय प्रवचन में बताया कि जीवन में प्रेम और तर्क उतारने के लिए तीन सरल तरीके हैं। अभ्यास, अनुभव और अध्ययन। जब आप सत्य का अध्ययन करते हैं तो अभ्यास के दौरान अनुभव का नवनीत सहज ही प्राप्त हो जाता है। अध्ययन करते वक्त पांच बातों का ध्यान रखा जाए। अभिरुचि, अध्यापक, ग्रंथ ,सिद्धांत और भाषा ज्ञान। अध्ययन में अभ्यास आवश्यक है और अभ्यास में चार बातों का ध्यान रखना चाहिए- रुचि ,दिशा, मार्गदर्शन और निरंतरता अध्यात्म का अनुभव, अध्ययन और अभ्यास जीवन को सर्वश्रेष्ठता प्रदान करता है। और उन्होंने बताया कि संगत से उत्थान है, संगत से पतन है, संगत सोच समझकर करें।

उन्होंने कहा संगत से जीवन का विकास और विनाश दोनों ही संभव है संगत में संयम की शीतलता और अच्छाइयों की सहवास होगा तो जीवन में सुख शांति और समृद्धि का विकास हो जाएगा जैसी संगत होगी, वैसे उपाय मिलेंगे। धर्मात्मा की संगत करेंगे तो धर्मार्जन के उपाय मिलेंगे और धनवान की संगत करेंगे तो धनार्जन के उपाय मिलेंगे। बस आपको उपयोग करना आना चाहिए। संगत से संस्कार, समाधान ऊर्जा और श्रद्धा चार चीज मिलती है और इन चारों से संसार की सारी वस्तुये सुलभ है आध्यात्मिक संगत से संसारातीत होने का संस्कार मिलता है। तथा आध्यात्मिक संगत का प्रयास करें और जब भी ऐसी संगत प्राप्त हो इसका भरपूर सदुपयोग करें।

 

15 में को महाराज श्री संघ सानिध्य में होगा भक्तामर महामंडल विधान
महाराज जी के सानिध्य में 15मई गुरूवार को श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन जुना मंदिर नवीन जिनालय खांण्डुपुरा में भक्तामर विधान होगा उसके बाद शाम को मिश्रोली के लिए महाराज जी का विहार होगा।
संकलित जानकारी के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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