जीवन का पहला कार्य भगवान के लिए :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुंसी
श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज) में साधनारत गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ससंघ सान्निध्य में श्री अजितनाथ जी भगवान का जन्म व तप कल्याणक महोत्सव मनाया गया। भगवान की शांतिधारा कराने का सौभाग्य पवन जैन सवाईमाधोपुर एवं श्रवण लोंग्या सवाईमाधोपुर वालों ने प्राप्त किया। भक्ति भावों के साथ भगवान अजितनाथ जी की स्तुति की गई। तत्पश्चात जन्म व तप कल्याणक के उपलक्ष्य में अर्घ्य समर्पित किए गये।
प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधन देते हुए माताजी ने कहा कि – जीवन में जो कुछ भी पहला-पहला हो वह भगवान को देना शुरू करें। प्रतिदिन पैरों को सबसे पहले मंदिर ले जाइये। होठों पर पहला नाम प्रभु का लीजिये, आँखों को पहला दर्शन भगवान का दीजिए और कोई भी काम शुरू करें उसकी पहली कमाई दान में दीजिए फिर देखिए जीवन में कैसे सुख – शांति – समृद्धि बढ़ती है। आज का व्यक्ति यह सोचता है कि सब दुःख दूर होने बाद, प्रसन्न मन से भगवान की भक्ति करूं यह उसका वहम है। जबकि प्रसन्न मन से जो भगवान की भक्ति करता है उसके वास्तविक दुःख दूर हो जाया करते है।


आगामी 25 फरवरी 2024 रविवार को पूज्य विज्ञाश्री माताजी का 30 वाँ दीक्षा दिवस महोत्सव श्री विज्ञातीर्थ क्षेत्र पर बड़े ही धूम-धाम से मनाया जावेगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
