भक्ति में तर्क बुद्धि नहीं बल्कि भोलापन और थोड़ा बहुत पागलपन चाहिए प्रसन्न सागर महाराज
रुद्रप्रयाग
परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज का मंगल विहार अष्टापद बद्रीनाथ से हरिद्वार की ओर चल रहा है आचार्य श्री ने 7 दिन में 180 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है।
आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागर महाराज ने अपने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि आओ आज आपकी भक्ति का हिसाब करते हैं,
कुछ अनकहा जो आपके दिल में है..
उसे अपने लफ्जों में बयां करते हैं..!

उन्होंने परमात्मा की भक्ति के विषय में बताया कि भक्ति में तर्क बुद्धि नहीं बल्कि भोलापन और थोडा बहुत पागलपन चाहिए। बुद्धि का चातुर्य और तर्क की तिकड़मबाजी परमात्मा को रिझाने में काम नहीं आती। इसके लिए तो बच्चों जैसा भोलापन और मीरा जैसा पागलपन चाहिए।

उन्होंने कहा भक्ति में सिद्धान्त मत खोजना और सिद्धांत में भक्ति भाव मत लगाना।

एक भक्त भगवान से दु:खी होकर कहता है -? हे परमात्मा – ठण्ड बहुत पड़ रही है, बाजार भी मन्दा है, ग्राहक भी नहीं आ रहे हैं, बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। मैं क्या करूं-? परमात्मा ने कहा –हे वत्स! यदि तुमको नीचे नहीं जम रहा हो तो ऊपर आ जा
– भक्त बोला -*शश नहीं नहीं प्रभु, सब ठीक है। मैं तो मजाक कर रिया था…!!! – नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

