पाप ही नहीं पुण्य का भी सामूहिक बंध होता है सुधासागर महाराज
बहोरीबंद
पाप ही नहीं पुण्य का भी सामूहिक बंध होता है आप लोग मैच आदि देखते हैं ना आप बोल फैंक रहें न ही बैटिंग फिर भी खिलाड़ियों को देखकर आप अपने स्थान पर ही ऊंचे नीचे होते हैं और सामूहिक पाप बांधते रहते हैं इसी प्रकार जब आप किसी तीर्थ पर संत के सान्निध्य के लिए प्रयास करते रहते है और विधान आदि के माध्यम से सामूहिक पुण्य का बंध कर सकते हैं उक्त आशय के उद्गार शान्ति नाथ दिग जैन बहोरीबंद तीर्थ मे धर्मसभा मे मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने व्यक्त किये ।
प्रकाश आने वाला है हम जाग जाये*
उन्होंने कहा कि जागोगे तब प्रकाश होगा या प्रकाश आने वाला है तो हम जाग जाये सूर्य पूर्व दिशा से उदय होता है वह किसी व्यक्ति विशेष को प्रकाश नहीं देता बल्कि जो भी अपने द्वार खोल कर बैठा है उसे प्रकाश मिल जायेगा इसी प्रकार धर्म आपको करने का मौका मिला है संत आपके नगर में तीर्थ पर आये है तो पुण्य के इस अवसर को अपने हाथों से जाने ना दे सौभाग्य मिला है तो उसे परम सौभाग्य में बदल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि भावना बनाओ किस लिये हम जिन्दा है थोड़ा सा विकल्प थोड़ी सी भावना बनाओ पूंजी तो लगें स्वयं की और फिर व्यापार होगा आप ग्राहक की चिन्ता मत करना ग्राहकों की लाइन लगेगी । जो व्यक्ति भगवान को स्थान देता है भगवान उस पर अपनी कृपा सदा बंनाए रखता है ऐसा हो नहीं सकता कि जो भगवान को स्थान दे उसके जीवन में स्थान की कमी हो ही नहीं सकती ऐसा विश्वास बनाये।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी
