संस्कारों की रक्षा अनिवार्य मुनिश्री विनम्र सागर महाराज
उज्जैन
परम पूज्य मुनि श्री 108 विनम्र सागर महाराज ने वर्तमान परिपेक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज के युग में जहां भौतिकता हावी है, वहां आत्मिक चेतना, और धार्मिक संस्कारों रक्षा अति आवश्यक है। नव हिंदू जागरण के लिए हिंदू शौर्य, अस्मिता गौरव, संस्कृति एवं न्यायोचित वीरता उन्नयन पर मार्गदर्शित आयोजित समागम में मुनि श्री ने यह बात कही।
धर्म के अनुरूप आचरण रखने की सीख दी
परम पूज्य मुनि श्री 108 विनम्र सागर महाराज ने धर्म के अनुरूप आचरण की सीख देते हुए अपने मंगल प्रवचन में कहा कि धर्म को आगे बढ़ाना, उसे आने वाली पीढियां तक पहुंचाना यह हम सभी का सामूहिक दायित्व है।


उन्होंने कहा हर सनातनी अपने तिलक, अपने घर की सज्जा और आचरण से पहचाना जाना चाहिए। जब हमारा आचरण धर्म की अनुरूप होगा तभी समाज में धर्म की वास्तविक पहचान स्थापित होगी। फ्रीगंज में आयोजित संत सत्कार समिति की अगुवाई में हुए आयोजित कार्यक्रम में मुनि श्री ने इस बात पर जोर दिया।
संस्था के अध्यक्ष श्याम माहेश्वरी सचिव भगवान शर्मा ने बताया कि महाराज श्री ने सनातन धर्म की महत्ता पर कहा कि धर्म को जीवित रखना केवल पुस्तकों या मंदिर तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धर्मिष्ट लोगों की जीवन शैली में स्पष्ट झलकना चाहिए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





