पट्टाचार्य महोत्सव का हुआ समापन नियोग संयोग और वियोग इस जीवन का सार पट्टाचार्य विशुद्सागर महाराज

धर्म

पट्टाचार्य महोत्सव का हुआ समापन नियोग संयोग और वियोग इस जीवन का सार पट्टाचार्य विशुद्सागर महाराज
इंदौर
इंदौर स्थित श्री सुमतिनाथ दिगंबर जिनालय, गोधा एस्टेट पर आयोजित छह दिवसीय पट्टाचार्य महोत्सव का समापनगुरूभक्ति, साधना और धर्मप्रभावना के अद्वितीय संगम के साथसंपन्न हुआ। इस अवसर पर गणाचार्य श्री 108 विराग सागरमहाराज का 62वां अवतरण दिवस हर्षोल्लास से मनाया गया।पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को
भाव-विभोर कर दिया, जिसमें उन्होंने नियोग, सयोग और
वियोग को जीवन का सार बताया और गुरूसेवा को मोक्षमार्ग
का आधार बताया।

श्री सुमतिनाथ दिगंबर जिनालय, गोधा एस्टेट, सुमतिधाम में
आयोजित पट्टाचार्य महोत्सव के अंतिम दिन जनसैलाब उमड़ पड़ा।देश-विदेश से पधारे जैन धर्मावलंबियों ने गुरु दर्शन-पूजन में भाग लेकर धर्म लाभ अर्जित किया। इस अवसर पर गणाचार्य श्री 108विराग सागर महाराज के 62वें अवतरण दिवस को हर्षोल्लास केसाथ मनाया गया।

 

समापन अवसर पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने देशना
मंडप से प्रवचन देते हुए कहा,“नियोग, सयोग और वियोग – यही जीवन का सार हैं। नियोग विधिऔर भाग्य का प्रतीक है, और यह आयोजन उसी नियोग का परिणाम हैं।इतने मुनियों और आर्यिकाओं का एक साथ संग, लाखोंश्रद्धालुओं की उपस्थिति – यह दृश्य प्रभु की भी योजना से परे नहीं रहा।

 

 

उन्होंने कहा,”यह अवसर इतना दिव्य और दुर्लभ है कि यहाँ से जातेसमय आंखें बंद कर भावनाओं में डूब जाना चाहिए। जो लोग यहाँसेवा कर रहे हैं – सफाई, मंच निर्माण, संयोजन – वे भविष्य मेंसौधर्म इन्द्र, समवसरण निर्माता और तीर्थंकर बनने की दिशा मेंअग्रसर हैं।” उन्होंने मनीष गोधा को संबोधित करते हुए कहा,
“तुम्हारा पुरुषार्थ प्रशंसा योग्य है, किंतु अहंकार से बचना, वरना मानकषाय में बदल सकता है।पट्टाचार्य महाराज ने कहा कि अब वियोग का क्षण है – अतिथि अपनी इच्छा से आते हैं, पर जाते समय उन्हें सम्मान व समर्पण देकर विदाई देना चाहिए।

गुरु तप साधना और पुण्य प्रभावना का उत्सव
पट्टाचार्य महाराज ने कहा, “गुरु भाव सागर से तारने वाला होता हैजिसकी अंतःप्रेरणा में आत्मविश्वास और कल्याण की भावना हो,उसका पुरुषार्थ सफलता दिलाता है। जब तक सम्यक नियति नहींहोगी, तब तक सफलता नहीं मिल सकती।” उन्होंने * गणाचार्य विरागसागर जी महाराज को वटवृक्ष बताते हुए कहा, “जिनके नीचे अनेकसंतों ने अपनी साधना को संजोया और धर्म की सेवा की।

विशेषांक पत्रिकाओं का विमोचन
इस आयोजन के दौरान *जैन समाज की 40 से अधिक विशेषांकपत्रिकाओं का विमोचन पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के सान्निध्यमें संपन्न हुआ। विमोचन का संचालन मुनिश्री सुप्रभ सागर जी वमुनिश्री प्रणत सागर जी ने किया।इसमें * उत्कर्ष समूह भारत की प्रेरणा से प्रकाशित पत्रिकाएं, डॉ.सुनील संचय (ललितपुर), राजेंद्र जैन महावीर ( सनावद), मनीष-सपना गोधा (सुमतिधाम) आदि की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।आचार्य विनम्र सागर महाराज ने मनीष – सपना गोधा की आयोजनक्षमता की सराहना करते हुए कहा,“उन्होंने 5700 वर्षों का पुण्य अर्जित कर लिया है। “

 

संतों का दिव्य सान्निध्य
इस 6 दिवसीय महोत्सव में जैन समाज को अनेक संतों का पावनसान्निध्य प्राप्त हुआ। इसमें निम्न संत प्रमुख रूप से शामिल हुए:
– गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज ससंघ**
– आचार्यश्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ**
-आचार्यश्री 108 प्रज्ञा सागर जी, सुंदर सागर जी, विशद सागर जी,विभव सागर जी, विहर्ष सागर जी, विनिश्चय सागर जी, विनम्र सागरजी, प्रसन्न ऋषि जी, विप्रणत सागर जी, विभक्त सागर जी आदि ऐलक, क्षुल्लक, क्षुल्लिका रहे।

 

तीर्थ-विहार ट्रैवल्स से मिला आभासी तीर्थदर्शन का अनुभव
गुरुभक्त परिवार द्वारा बच्चों और श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठी
पहल की गई ।

तीर्थ विहार ट्रैवल्स नामक एक झांकी बस में बैठकर ही श्रद्धालुओं ने श्रवणबेलगोला, सम्मेद शिखर और कुंडलपुरके दर्शन प्राप्त किए। 

 

 

बाहुबली भगवान का महामस्तकाभिषेक*
बड़े बाबा की छवि और शिखरजी की आभा को वीडियो
माध्यम से अनुभव कराया गया, जिससे इंदौर नगरी में ही तीर्थ कीअनुभूति संभव हो पाई।

विधि-विधान और गुरुभक्ति की झलक
गुरुभक्त परिवार एवं पट्टाचार्य महोत्सव समिति ने जानकारी दी किअंतिम दिन सुबह * धर्मचंद्र शास्त्री* चंद्रकांत ईंडी*, * नीतिन
झांझरी* के निर्देशन में देव स्तुति, विधान, अभिषेक व शांतिधारा
संपन्न हुई। सुबह 8 बजे से अवतरण दिवस उत्सव की शुरुआत हुई,जिसमें चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन और गुरुवर की तपस्या केगुणानुवाद के साथ श्रद्धालुओं ने अपनी भावना प्रकट की।

समापन संदेश
यह 6 दिवसीय पट्टाचार्य महोत्सव जैन धर्म, तप, साधना और
गुरुभक्ति का अनूठा संगम बनकर उभरा। नियोग से प्रारंभ हुआ यहआयोजन, वियोग की स्मृतियों के साथ सभी के हृदय में एक अमिटछाप छोड़ गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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