भारतीय संस्कृति ही ऐसी संस्कृति है, जिसमें आध्यात्मिक योग और साधनाओं को देखा जाता है भावसागर महाराज
खिमलासा
पूज्य मुनि श्री 108 भावसागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि तलाक से परिवारों को बचाना जरूरी है, परिवार में सामंजस्य बनाएं, जिस पति-पत्नी में विवाद नहीं हो।
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महाराज श्री ने कहा कि ज्ञान, संयम, तप और सेवा इन चारों का योग चातुर्मास है। जिसमें साधुओं के साथ-साथ गृहस्थ भी धर्म का अपूर्व अवसर प्राप्त करते हैं। चातुर्मास के संबंध में कहा कि वर्षा ऋतु का सुयोग, सर्वत्र हरियाली का योग हर जगह योग का ऐसा दृश्य उपस्थित करता है कि इसका नाम वर्षा योग भी सार्थक होता है। यूं तो आषाढ़ कृष्णा 15 से सावन, भादो, अश्विन, कार्तिक कृष्ण 15 तक साढ़े तीन माह का चातुर्मास होता है। जहां साधुगण रहते है, वहां धार्मिक उत्साह और हर्ष छा जाता है। साधु तथा श्रावकों का धार्मिक योग ही धर्म युग वर्षा का योग है।

पूज्य महाराज श्री ने भारतीय संस्कृति के विषय में भी प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति ही एक ऐसी संस्कृति है, जिसमें आध्यात्मिक, योग साधनाओं को देखा जाता है।
इस पावन भूमि पर ही ऐसे पुण्य देखने को मिलते हैं जो आध्यात्मिक साधना को महत्व देते हैं। इसलिए इस भारत भूमि को मंदिर का रूप कहा गया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
