सम्मान हमेशा गुणों से होता है हम भगवान की जितनी जय करेंगे उतनी ही हमारी जय होगी स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने अतिशय क्षेत्र पर दूसरों का आदर करने के विषय पर प्रकाश डाला।
पूज्य गुरु मां ने विस्तृत रूप से कहा कि सम्मान हमेशा गुणों से होता है हम भगवान की जितनी जय करेंगे उतनी ही हमारी जय होगी। जितना हम लोगों का सम्मान करेंगे उतना हमारा मान बढ़ेगा, इसलिए मन में सम्मान की भावना को जागृत करना होगा।





उन्होंने कहा कि मनुष्य बहुत स्वार्थी हो रहा है। अन्य की उपेक्षा करके स्वयं उनसे सम्मान की अपेक्षा पाले रखता है। ज्ञान हमारा निज धन है। आत्मा की तृप्ति बाह्य पदार्थ में नहीं, आत्मा की तृप्ति ज्ञान में है। ज्ञान से ही त्याग की भावना आती है। न्याय शास्त्र का विषय न्याय से है।
माताजी ने कहा कि आचार्य कुंदकुंद ने चारित्र ही धर्म है ऐसा कहा है। हमें बुखार हो गया, हम डॉक्टर के पास गए , हमें दवाई दे दी, लेकिन हमने दवाई घर आकर रख दी, खाई नहीं तो बुखार नहीं उतरेगा। ज्ञान की कीमत तो है लेकिन ज्ञान के साथ चारित्र की कीमत अधिक है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
