उदार परोपकारी बने और अपनों को माफ करें मौत और परमात्मा ये अकाट्य सत्य है इसे स्वीकार करें प्रसन्न सागर महाराज

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उदार परोपकारी बने और अपनों को माफ करें मौत और परमात्मा ये अकाट्य सत्य है इसे स्वीकार करें प्रसन्न सागर महाराज
अन्तर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज की कुलचाराम से बद्रीनाथ अहिंसा संस्कार पदयात्रा चल रही है आज पदविहार में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि ऐ किस्मत! तू खेलती बहुत है हमारी खुशीयों से..हम भी इरादे के पक्के हैं, मुस्कुराना नहीं छोड़ेंगे..!

 

गुजरा हुआ वक्त मृत हो गया, आने वाले वक्त का कुछ पता नहीं है। मेरे पास सिर्फ आज और अभी वक्त है। इसे रोकर गुजारूं या हँसकर निकालूं — ये हमारे, आपके हाथ में है। बीता हुआ कल इतिहास बन गया, जिस पर हमारा आपका ना कोई अधिकार, ना कोई वश।

महाराज श्री ने कहा बीते हुये वक्त को लेकर अफसोस करना या मन को मसोसने से कोई भी हल निकलने वाला नहीं है।आने वाला कल रहस्यमय है, जिसे कोई जान नहीं सका। कहने का मतलब है- कि हमारे पास सिर्फ आज का वक्त है यानि वर्तमान। इसी वक्त को जीना है, जीने का उद्देश्य तय करना है और जीवन के अर्थ को जानना है।शेष भविष्य में क्या होगा ये ना राम जान पाये, ना श्री कृष्ण, फिर हम आप कौन से खेत की मूली है-?यदि हम भविष्य को लेकर हैरान, परेशान हो रहे हैं तो हम पढ़े-लिखे, समझदार मूर्ख है। जिसका कोई समाधान नहीं है, ना किसी के पास था।

महाराज श्री ने कहा आज को जीने के लिये तीन बातें समझ सको तो समझो अपने आस पास के वातावरण को ध्यान से देखें और अपने आपको संभाले।

 

उदार, परोपकारी बने और अपनों को माफ करे।

मौत और परमात्मा ये अकाट्य सत्य है, इसे स्वीकार करो…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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