शीतल तीर्थ मतलब जंगल मे मंगल-सहस्रादिक श्रावकों ने किया मुनि ऋषभदेव का पड़गाहन

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शीतल तीर्थ मतलब जंगल मे मंगल-सहस्रादिक श्रावकों ने किया मुनि ऋषभदेव का पड़गाहन

शीतल तीर्थ (धामनोद) रतलाम, 25 फरवरी ।
पुण्यवान आत्मा खुद कुछ नही करती सब अपने आप हो जाता है- चर्या शिरोमणि आचार्य विशुद्धसागर सागर महामुनिराज की केवलज्ञान कल्याणक की देशना में प्रयुक्त की गई ये पंक्तियां शीतल तीर्थ पंचकल्याणक महोत्सव की प्रभावना का साक्षात उदाहरण है ।

 

प.पू. प्रज्ञा पुरुषोत्तम, खण्ड विद्याधुरंधर, समाधिस्थ चतुर्थ पट्टाचार्य 108 श्री योगीन्द्रजी महामुनिराज की प्रेरणा एवं ब्र. डॉ सविता दीदी के निर्देशन में निर्मित शीतल तीर्थ के कृत्रिम कैलाश पर्वत पर भगवान आदिनाथ एवं 72 जिनालय का दिनांक 22से 28 फरवरी तक आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पंचकल्याणक महोत्सव एवं महामस्तकाभिषेक महोत्सव के चतुर्थ दिवस में  मुनिराज ऋषभदेव की आहारचर्या में एक साथ हजारों श्रावकों ने शुद्ध वस्त्रों में मुनि ऋषभदेव का पड़गाहन किया ।
यूं तो प्रारम्भ से ही इस आयोजन में आतिशायिक संकेत उत्पन्न होते रहे जो इस आयोजन की सफलता का सूचक है ।
आयोजन के प्रारम्भ की पूर्व संध्या पर एक आर्यिका दीक्षा एवं समाधि, प्रथम दिवस गर्भ कल्याणक के दिन 3 जैनेश्वरी दीक्षा, जैन सशक्त महिलाओं को समर्पित ग्लोबल महासभा के महिला फोरम द्वारा राष्ट्रीय महिला सम्मेलन, जन्म कल्याणक दिवस पर ऐसे एकान्त में भी जन्मकल्याणक महोत्सव की भव्य शोभायात्रा, तप कल्याणक के दिन एक साथ 108 राजाओं की प्रतीकात्मक दीक्षा, ओर चतुर्थ दिवस केवलज्ञान कल्याणक के दिन होने वाले प्रत्येक आयोजन ने तो जैसे इतिहास रच दिया हो ।

दिक्षोपरांत मुनि ऋषभदेव के प्रथम आहार का सौभाग्य राजा श्रेयांस के रूप में यू तो गुवाहाटी के श्रेष्ठी श्री नरेन्द्र-संध्या रारा परिवार को प्राप्त हुआ पर यहां उपस्थित प्रत्येक श्रावक इस पुण्य उपक्रम से जुड़ने को लालायित नजर आ रहा था ।

 

 

दोपहर में दक्षिण भारत से आये भट्टारक त्रय के बहुमान ओर उद्बोधन के साथ भट्टारक सम्मेलन का आयोजन हुआ । 
तदोपरांत केवली ऋषभदेव के समवशरण में गणधर के रूप में विराजित चर्या शिरोमणि आचार्य विशुद्धसागर सागर जी एवं दिव्य तपस्वी आचार्य सुंदर सागर जी मुनिराज द्वारा देशना एवं उपस्थित श्रावकों की जिज्ञासाओं का सम्यक समाधान किया गया ।
इस समय खचाखच भरे पांडाल से बाहर भी उतनी ही श्रावक संख्या नजर आ रही थी मानो साक्षात तीर्थंकर की देशना को सुनने के लिए जैसे पूरे भारतवर्ष के प्रत्येक प्रान्त के प्रतिनिधि यहाँ उपस्थित हुए हो ।आयोजन अभी अनवरत चल रहा है पर आज क्षेत्र पर जन समूह की उपस्थिति ने यह सिद्ध कर दिया कि शीतल तीर्थ का मतलब है-जंगल मे मंगल ।

राकेश जैन ‘चपलमन’प्रचार मंत्री से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

 

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