वर्तमान समय में युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता की चकाचोंध में अपने भारतीय संस्कारों से विमुख होती जा रही है मृदुमति माताजी

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वर्तमान समय में युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता की चकाचोंध में अपने भारतीय संस्कारों से विमुख होती जा रही है मृदुमति माताजी
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बड़ा बाजार दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन देते हुए आर्यिका 105 मृदुमति माताजी ने कहा कि वर्तमान समय मे युवा पीढ़ी पाश्चात्य सभ्यता की चकाचोंध में अपने भारतीय संस्कारों से विमुख होती जा रही है। भारत देश में माता,-पिता,मित्र, धर्म जीवन मूल्यों आदि का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। जिनसे विमुखता से हमारी संस्कृति, संस्कारों और परिवारों में व्यापक का असर होने लगा है।

 

 

पूज्य माताजी ने कहा कि जैन धर्म जो की अनादि काल से चला आ रहा है। इसको और आगे बढ़ाने की जरूरत है। जैन धर्म की शिक्षा देना आज की युवा पीढ़ी और छोटे बच्चों को अनिवार्य हो गया है। इससे उनमें त्याग तपस्या और संस्कारी होने की भावना आती है। माताजी ने कहा कि सही शिक्षा के साथ अच्छे संस्कार हो तो जीवन का चहुंमुखी विकास संभव है। बालक का जन्म अच्छे संस्कारों से होता है। आवश्यकता है जीवन को संस्कारवान बनाया जाए क्योंकि जब तक जीवन संस्कारित नही होगा तब तक वह समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी कैसे होगा।

 

 

 

 

माताजी ने कहा कि आज का बालक कल का भारत है। राष्ट्र का भावी निर्माता है, बालक देश की धरोहर है, जिस प्रकार धन की रक्षा के लिए सुरक्षा के अच्छे इंतजाम किए जाते हैं। ठीक उसी प्रकार बालक के जीवन की सुरक्षा करना माता-पिता का प्रथम कर्तव्य होता है। इसलिए धार्मिक संस्कार अपने बच्चों को देना जरूरी है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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