यदि बड़े तीर्थ दो छोटे तीर्थ को गोद ले ले तो छोटे तीर्थ का भी संरक्षण अपने आप हो जाएगा स्वस्तिभूषण माताजी जैन पत्रकारों की तीर्थ संरक्षण में क्या भूमिका पर विशेष संगोष्ठी संपन्न

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यदि बड़े तीर्थ दो छोटे तीर्थ को गोद ले ले तो छोटे तीर्थ का भी संरक्षण अपने आप हो जाएगा स्वस्तिभूषण माताजी जैन पत्रकारों की तीर्थ संरक्षण में क्या भूमिका पर विशेष संगोष्ठी संपन्न
जहाजपुर
परम पूजनीय भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य में पंचम जैन पत्रकार महा सम्मेलन के प्रथम दिवस प्रथम सत्र जो 22 मार्च की बेला में हुआ इस सत्र में जैन पत्रकारों की तीर्थ संरक्षण में क्या भूमिका हो इस पर सभी पत्रकार बंधुओ ने अपने विचार रखें। कार्यक्रम का संचालन राकेश जैन चपलमन ने किया। सर्वप्रथम स्वागत भाषण जैन पत्रकार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री रमेशचंद तिजारिया ने दिया उन्होंने कहा कि हम पत्रकारों को जैन समाज के लिए बहुत कुछ करना है समाज को यदि बचाना है तो क्षेत्र का प्रचार प्रसार करना होगा। इसी क्रम में महामंत्री श्री उदयभान जैन ने कहा कि इस महासंघ का गठन एवं शुभारंभ का प्रथम अधिवेशन आचार्य ज्ञान सागर महाराज के आशीर्वाद से शुरू हुआ था एवं द्वितीय अधिवेशन स्वस्ति भूषण माताजी के सानिध्य में संपन्न हुआ था और आज पुनः दूसरी बार आपके सानिध्य में यह अधिवेशन और रहा है। स्वस्तिधाम तीर्थं का जिक्र करते हुए श्री जैन ने कहा कि यह तीर्थ विश्व का अनुपम तीर्थ हो चुका है महासंघ के लिए गौरव की बात है कि आज इसके 200 सदस्यों का लक्ष्य था और संघ ने 205 सदस्यों का लक्ष्य पूरा कर लिया है। उन्होंने भी तीर्थ संरक्षण की बात की।

 

 

इस अवसर पर श्रीफल न्यूज़ की रेखा जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम तीर्थ बताएंगे तभी हम बचेंगे तीर्थ संसार सागर को पार लगाने वाले होते हैं हमें एकजुट होना होगा तभी यह क्षेत्र बचेंगे। श्री दिलीप जैन ने कहा कि हमें तीर्थ संरक्षण के लिए संस्कार देने होंगे चिंतन मनन करना होगा श्री महेंद्र बैराठी ने कहा कि तीर्थ संरक्षण की आवश्यकता क्यों पड़ी प्रभाव क्यों है। उन्होंने तीर्थ पर परिवार को रहने एवं बसाने की बात की। साथ ही उन्होंने कहा कि पुराने तीर्थ क्षेत्र अतिशय क्षेत्र हमारी धरोहर के रूप में विकसित किया जाए। तीर्थ क्षेत्र में समन्वय के लिए कोई योजना बननी चाहिए। साथ ही इस सम्मेलन में तीर्थ क्षेत्र पर पर्याप्त व्यवस्था हो संरक्षण हो ऐसा काम होना चाहिए इस पर भी जोर दिया गया।

 

शंशाक सिंघई ने आचार्य शांति सागर महाराज को स्मृति में लाते हुए कहा कि आचार्य शांति सागर महाराज ने तीर्थ के संरक्षण के लिए अनशन किया था आज तीर्थ के संरक्षण के लिए पूर्ण रूप से उसे चरितार्थ करने की आवश्यकता है। क्षेत्र के संरक्षण एवं संवर्धन की बात करते हुए इस बात पर भी जोर दिया गया कि तीर्थ क्षेत्रों में एकजुटता की कमी भी होती है उसे भी दूर किया जाना चाहिए इस पर भी विचार किया गया।

 

 

श्री राजेश जैन रागी कहा कि तीर्थ हमारी संस्कृति का परिचायक है धरोहर है जो भी इसका संरक्षण संवर्धन कर रहे हैं वह साधुवाद के पात्र हैं उन्होंने पत्रकारों के विषय में जिक्र करते हुए कहा कि पत्रकार समाज का पहरा मार्गदर्शन है कलम का परिचय देते हुए प्राचीनता नष्ट ना हो इस पर भी लेख लिख सकते हैं। इस अवसर पर सुरेंद्र जैन रांका रामगंजमंडी, राजाबाबू गोधा फागी आदि ने अपने विचार रखें।

इस पुनीत प्रसंग पर स्वस्ति भूषण माताजी ने पत्रकारों की और ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि अंदर जिनके जितनी जागृति होगी वही लिख पाता है।माताजी ने कहा कि पत्रकार देते तो बहुत कुछ है मगर लेते कुछ नहीं।उन्होंने कहा कि उनकी ऊर्जा से बहुत बड़े काम हो सकते हैं। ऊर्जा का सदुपयोग कैसे हो इस पर पत्रकारों को विचार करना चाहिए इसका एक कोटा तैयार होना चाहिए। कथनी और करनी में बहुत अंतर होता है।

तीर्थ संरक्षण के विषय में माताजी ने कहा कि यदि बड़े तीर्थ छोटे तीर्थ को गोद ले ले तो तो तीर्थों का संरक्षण हो गया समझना इसीलिए बड़े तीर्थों को छोटे तीर्थों के संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए और तभी तीर्थों का संरक्षण और संवर्धन विकास होगा।

माताजी ने कहा कि लिखने वाला जब लिखकर उठना है तो लगता है कि वह सागर में डूब कर आया हो।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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