जिनेंद्र भगवान के वचन औषध समान हैं समय सागर महाराज
खुरई
धर्म नगरी खुरई में आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से प्रथम दीक्षित निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समय सागर महाराज संघ का वर्षायोग चल रहा है।
प्राचीन दिगंबर जैन मंदिर में सोमवार की बेला में प्रवचन देते हुए पूज्य मुनि श्री ने कहा कि जिनेंद्र भगवान के वचन औषध के समान है। अनादि काल से संसारी प्राणी पंचेंद्रिय विषयों का भक्षण करके जन्म जरा मृत्यु रूपी रोग से ग्रसित है। इस रोग को भगवान की वाणी ही दूर करने में क्षय करने में सक्षम है।
महाराज श्री ने कहा कि व्यक्ति ज्ञान पदार्थ को जानता है परंतु ज्ञान के द्वारा अगर पदार्थ प्रभावित हो गए हैं और अच्छे बुरे की, अपनी पराए की कल्पना अगर हो जाती है तो वह कर्मबंध में कारण है। ज्ञान से संसार का अंत नहीं हो सकता। इसीलिए ज्ञान शिक्षा वही श्रेष्ठ है जो जन्म और मृत्यु से ऊपर उठा दे। सभी जगह ज्ञान को महत्व दिया जा रहा है। मगर ज्ञान से ही नहीं उसके सदुपयोग से आत्मा कल्याण होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
