आचार्य श्री प्रज्ञासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर प्रथम बार इतने संतों का मिला सानिध्य मुख्यमंत्री मोहनलाल यादव ने भी आकर लिया आशीर्वाद

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आचार्य श्री प्रज्ञासागर महाराज के दीक्षा दिवस पर प्रथम बार इतने संतों का मिला सानिध्य मुख्यमंत्री मोहनलाल यादव ने भी आकर लिया आशीर्वाद
उज्जैन
राजकीय अतिथि का दर्जा प्राप्त आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज का 36 वा दीक्षा दिवस तपोंभूमि उज्जैन में मनाया गया जिसमें देश भर से भक्त सम्मिलित हुए वहीं संध्या बेला में दीक्षा दिवस के पुनीत अवसर पर मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री श्री मोहन लाल यादव ने आकर आचार्य श्री का आशीर्वाद लिया एवं समस्त संघों का आशीर्वाद लिया।

 

तपोभूमि में ऐसा प्रथम बार
मिली जानकारी अनुसार ऐसा पहली बार हुआ है कि जब उज्जैन में पहली बार अलग अलग संघ के 17 साधु संतों की उपस्थिति में उज्जैन नगर में साधु का दीक्षा दिवस मनाया गया हो। इन ऐतिहासिक पलो में सभी साधु संतों का महामिलन हुआ।

दोपहर की बेला में तपोभूमि उज्जैन में आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज का दीक्षा दिवस समस्त साधु संतों की उपस्थिति में मनाया गया। इस अवसर पर दीप प्रज्वलन चित्र अनावरण दीप प्रज्वलन पाद प्रक्षालन किया गया।

ऐसे तीर्थ बनाए हैं जहां पर जाने पर लगता है यही तीर्थंकर बनने का रास्ता है विज्ञाश्री माताजी
इस अवसर पर गणिनी आर्यिका 105 विज्ञाश्री माताजी ने आचार्य गुरुवर के दीक्षा दिवस पर भाव प्रकट करते हुए कहा कि आचार्य श्री प्रज्ञा सागर महाराज ने ऐसे तीर्थ बनाए हैं जहां पर जाने पर लगता है कि यही तीर्थंकर बनने का रास्ता हैं। इस अवसर पर मुनि श्री 108 समत्व सागर महाराज ने कहा कि आज तीन अलग अलग संघ के महाराज त्रिवेणी संगम में आप डुबतिया लगा रहे हैं। जो अविस्मरणीय क्षण है।

इस अवसर पर उपाध्याय विभजन सागर महाराज ने कहा कि दिगंबर संतो को मुनिराज कहें, महाराज नहीं। ग्रंथों में आचार्य उपाध्याय, मुनिराज का ही उल्लेख है।

     

आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने दीक्षा दिवस के महत्व को समझाया

       
अपने दीक्षा दिवस पर बोलते हुए आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने दीक्षा दिवस के महत्व को समझाते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने मोक्ष मार्ग का रास्ता एकमात्र दीक्षा बताया है। उन्होंने कहा कि इस जीवन का उद्धार तभी हो सकता है जब दिगंबर दीक्षा ली जाए।

 

और अपना जीवन साकार कर जाए। मैं अपने 36 में दीक्षा जयंती महोत्सव पर यह चाहता हूं कि सभी संयम के मार्ग पर चलें। मोक्ष मार्ग पर चलें यही आपका उद्धार करेगा। पद प्रतिष्ठा तो आती जाती रहती है। मुझे आचार्य बनाया तो मैने अन्य को दीक्षा दी। यही पद की प्रासंगिकता होती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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