जैन धर्म की प्राचीनता को लेकर प्रधानमंत्री को भेजा पत्र पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त ने ध्यान आकर्षित किया

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जैन धर्म की प्राचीनता को लेकर प्रधानमंत्री को भेजा पत्र पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त ने ध्यान आकर्षित किया
अलवर, 19 अप्रैल।

राजस्थान के पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र भेजकर जैन धर्म की प्राचीनता को लेकर पत्र भेजा है और ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि जी-20 सम्मेलन में भारत के विभिन्न धर्म एवं गतिविधियों के बारे में दी गई जानकारी में जैन धर्म को सिर्फ 2650 वर्ष प्राचीन बताया गया है जबकि जैन धर्म अनादि निधन सनातन धर्म है।

 

 

पत्र में उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री ने स्वयं नये संसद भवन में 24 तीर्थंकरों की प्रतिमा उकेरी जाने का उल्लेख अभी कुछ दिन पूर्व अपने संबोधन में किया है तथा जैन धर्म की विरासत को सहेजने का कार्य किया है।

 

पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि जी-20 सम्मेलन में सभी देशों के प्रतिनिधियों को बांटी गई पुस्तिका का अवलोकन कर जैन धर्म की प्राचीनता के संबंध में किए गए उल्लेख को संशोधित कराया जाये।
पूर्व नि:शक्तजन आयुक्त खिल्लीमल जैन ने बताया कि वस्तुत:सन् 2000 तक एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित पाठ्य पुस्तकों में जैन धर्म के संस्थापक भगवान महावीर को बताए जाने से यह भूल होना संभव है लेकिन इसका भविष्य में सुधार किया जाना महती आवश्यक है।

 

पत्र में आग्रह किया गया है कि जी-20 सम्मेलन में वितरण की गई पुस्तिका को संशोधित किए जाने की आज्ञा प्रदान की जाये एवं भविष्य में इस प्रकार की भ्रांतिपूर्ण सूचना प्रकाशित न हो, इसके लिए समुचित कार्यवाही की जाये।

—- उदयभान जैन जयपुर
मो-94143-06696 से प्राप्त जानकारी

संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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