मुंबई में हुई घटना निंदनीय है लेकिन आने वाली पीढ़ी को क्या भविष्य देने वाली है संजय जैन बड़जात्या
*रौंदी गई आस्था छला गया विश्वास*
*चला मुंबई बुलडोजर करा दिया अहसास*
*अहिंसक नही अब कायर हैं साहिब*
*नित मिटाए जाएंगे अब हमारे इतिहास*
मुंबई के विले पार्ले में स्थित पारसनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर बुलडोजर चलाकर जो घृणित कार्यवाही की गई है वह निंदनीय तो है ही लेकिन आने वाले भविष्य का एहसास भी करा रही है। *घटती जनसंख्या, आपसी वैमनस्यता,अहम की पुष्टि,धन वैभव से परिपूर्ण दिखावे में व्यस्त,असंगठित,नेतृत्व विहीन* जैन समाज इन सब घटनाओं की उत्तरदायी है।

आने वाले पीढ़ी को क्या भविष्य देने वाले हैं। मंथन, चिंतन,मनन अति आवश्यक है लेकिन ना तो किसी के पास समय है और ना ही कोई ऐसी घटनाओं से चिंतित और सबक लेने वाला है। कुछ दिन विचार विमर्श करने के बाद हम सब इस घटना को भूल जाएंगे।
यदि किसी अन्य संप्रदाय के साथ ऐसी घटना घटी होती तो संपूर्ण भारतवर्ष में न जाने कितने प्रदर्शन, रैली, ज्ञापन और नाना प्रकार के आंदोलन का रूप खड़ा हो गया होता लेकिन हम तो जैन हैं ? हम तो अहिंसक हैं? हमें तो मौन रहना है? हमारी रक्षार्थ तो कोई और आएगा? बस यही तो हमारे भगवान ने हमको सिखाया है?
उसी के उपदेशों पर हमें चलते हुए अपने जैनत्व की रक्षार्थ भीरू बन जाना है।

बात कड़वी है लेकिन दवा का काम कर जाए बस इसी उम्मीद के साथ सादर जय जिनेंद्र।
क्षमभिलाषी :- संजय जैन बड़जात्या कामां
