भगवान महावीर के सिद्धांत अनेकांत एवं स्वादवाद से परिपूर्ण है उपाध्याय विशोक सागर महाराज

धर्म

भगवान महावीर के सिद्धांत अनेकांत एवं स्वादवाद से परिपूर्ण है उपाध्याय विशोक सागर महाराज
झालरापाटन
आचार्य श्री 108विराग सागर महाराज के पट्टाधीश आचार्यश्री 108विशुद्ध सागर महाराज के शिष्य 108 विनीबोध सागर महाराज ने कहा कि अरिहंत तीर्थंकर भगवान की दृष्टि हमेशा नासा दृष्टि रहती है। शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगलवार को आयोजित धर्म सभा में मुनि महाराज ने कहा कि मनुष्य की दृष्टि ऊपर नीचे एक समान नहीं रहती है पलक झपकती रहती है। केवल तीर्थंकर भगवान ही नासा दृष्टि के होते हैं। उनके जन्म से ही उनको तीन ज्ञान प्राप्त होते हैं तथा चौथा ज्ञान मनप्रयाय ज्ञान होता है। आदिनाथ भगवान ने 1000 वर्ष तक तपस्या की उनके पुत्र बाहुबली भगवान ने 1 वर्ष की तपस्या में ही केवल ज्ञान प्राप्त कर लिया। इसीलिए तपस्या जितनी स्थिर एवं एक दृष्टि पर होगी उतनी ही जल्दी केवल ज्ञान की प्राप्ति होगी। यदि एक बार केवल ज्ञान प्राप्त हो जाता है तो वह जीव संसार में भटकता नहीं है।

 

इस बेला में उपाध्याय 105विशोक सागर महाराज ने बताया कि भगवान महावीर का सिद्धांत अनेकांत एवं स्वादवाद से परिपूर्ण है। जिसके माध्यम से सभी जीवो को जियो और जीने दो का संदेश देते हुए अनेकांतवाद के मर्म को समझाया है।

 

उन्होंने कहा दुनिया में जैन धर्म ही एक मात्र ऐसा धर्म है जो अनेकांत धर्म के सिद्धांत को पालता है एवं दुनिया के विभिन्न धर्म एकांतवाद का परिपालन करते हैं। एकांतवाद का मतलब यह होता है कि यह ऐसा ही है यह मानता है जबकि अनेकांतवाद विभिन्न अपेक्षाओ से परिपूर्ण है।

 

 

किसी को बाधित नहीं करता। जैसे राम एक है उनके रूप अनेक है वह सीता के पति है तो लव कुश के पिता है। राजा दशरथ व माता कौशल्या के पुत्र हैं। आदि अनेकों रूप में एक ही व्यक्ति होते हुए अनेकांतवाद के रूप में है। जबकि एकांतवाद में यह माना जाता है कि राम सीता के पति ही है यह मूल रूप से अंतर है। जैन धर्म इसीलिए अनेकांतवाद की वजह से अनादि निधन काल से चला आ रहा है और आगे भी अनंत काल तक चलेगा।

 

प्रवचन के प्रारंभ में हेमलता मंगल ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। संचालन राजकुमार जैन बैंक वाला ने किया।
नलिन जैन से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *