चार प्रकार का होता है धर्म दान शील तप भावशरीर की शोभा आभूषण मात्र से है।— साध्वी श्री सुपार्श्व निधि जी 

धर्म

चार प्रकार का होता है धर्म दान शील तप भावशरीर की शोभा आभूषण मात्र से है।— साध्वी श्री सुपार्श्व निधि जी 

महिदपुर रोड

स्थानीय श्री सुविधि नाथ जैन मंदिर परिसर स्थित राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में विराजित परम पूज्य साध्वी श्री सुपार्श्व निधि जी महाराज साहब ने मंगलवार को धर्म सभा में जिनवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि शरीर की शोभा आभूषण मात्र से है। हमें आत्मा की चिंता करना चाहिए न की शरीर की ,इसके विपरीत हम शरीर की चिंता करते हैं जो नाशवान है। पूज्य साध्वी जी ने चार प्रकार के धर्म दान,शील, तप , भाव का विस्तार से विवेचन किया।

 

 

तप के बारे में कहा गया है कि जो तप की भट्टी में तप गया कुंदन सा वही चमक गया। जिस प्रकार सोने को अग्नि में तपाने के बाद ही निखार आता है उसी प्रकार हमारे शरीर को भी तप रुपी अग्नि में तपने के बाद ही हमारी आत्मा में निखार आता है। प्रत्येक मनुष्य के अंदर ने तप करने की अपार शक्ति विद्यमान है बस हमें उसे शक्ति का सही दिशा मेंउपयोग करना है। तप करने से अनेक प्रकार के रोगों से हमें मुक्ति मिलती है एवं हमारी आत्मा निर्मल होती है मन परम प्रशांत होता है साथ ही अनंता अनंत पुण्यो का उपार्जन होता है।

 

धर्मसभा में सकल जैन श्री संघ, श्रावक श्राविकाओ ने उपस्थित होकर धर्म लाभ प्राप्त किया पूज्य साध्वी श्री के मंगलमय प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9: 15 से 10:30 बजे तक ज्ञान मंदिर की में चल रहे हैं ।

 

आप श्री की पावन निश्रा में 4 अप्रैल से 12 अप्रैल तक चैत्र मास की नव पद ओली आराधना विधि विधान के साथ संपन्न की जाएगी

 

प्रभावना एवं साधार्मिक भक्ति का लाभ रमेश चंद अमित कुमार अंकेश कुमार कोचर मावावाला परिवार ने लिया उक्त जानकारी जैन समाज की मीडिया प्रभारी सचीन भंडारी ने दी

     संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

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