बच्चों की शिक्षा गर्भ से ही प्रारंभ करें प्रज्ञा सागर महाराज
भवानीमंडी
परम पूज्य आचार्य श्री 108 प्रज्ञा सागर महाराज ने बुधवार की बेला में मंगल प्रवचन देते हुए भक्ति की शक्ति के विषय में बताते हुए गृहस्थ जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि गृहस्थ जीवन में कर्मों को समाप्त करने के लिए प्रभु की भक्ति करना चाहिए। क्योंकि भक्ति ही दुख सहने की शक्ति प्रदान करती है।
राधेश्याम मंदिर की बगीची में अपने उद्बोधन में आचार्य श्री ने जीव के विषय में बताते हुए कहा कि यह जीव अनादिकाल से संसार में भटक रहा है। जब कर्मों का उदय आता है तो अपने भी साथ छोड़ चले जाते हैं।
उन्होंने कहा पहले राजा धर्मनिष्ठ होते थे और प्रजा को न्याय देते थे। धर्म में जैसे को तैसा सिद्धांत चलता है। पत्थर को भगवान बना सकते हो लेकिन पहले आदमी को इंसान बनना जरूरी है। धर्म बाहर का नहीं बल्कि भीतर का परिवर्तन मांगता है।

उन्होंने अभिमन्यु के चक्रव्यूह भेदन का उदाहरण दिया और कहा कि बच्चों की शिक्षा गर्भ से ही शुरू कर देनी चाहिए। और यही उन्हें संस्कार देने का सही समय होता है।
हर स्त्री को गर्भ धारण करने के उपरांत सात्विक जीवन जीना प्रारंभ कर देना चाहिए। बच्चों को राम बनाने के लिए पहले माता-पिता को दशरथ एवं कोशल्या बनना होगा।
घर को स्वर्ग नरक बनाना हमारे हाथ में है। पूज्य गुरुदेव की मंगल आहारचर्या एवं चरण वंदना का लाभ महेंद्र कुमार तनुज कुमार गंगवाल परिवार भवानी मंडी को प्राप्त हुआ।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312





