श्रमण भगवान महावीर स्वामी के दिए गए उपदेश अहिंसा एवं शाकाहार का पालन करना वर्तमान के लिए आवश्यक
आज हम सभी श्रमण भगवान महावीर स्वामी का जन्मोत्सव मना रहे हैं।
यह जन्मोत्सव मनाना सार्थक तभी होगा जब हम प्रभु महावीर के अहिंसा शाकाहार जियो और जीने दो का संदेश जन-जन तक पहुंचाएं एवं जीवन में अनुसरण कर सकें। आज हिंसा का तांडव हमें देखने को मिल रहा है शस्त्रीकरण की होड़ से आज हर कोई असुरक्षित महसूस कर रहा है। हिंसा से पीड़ित विश्व आज महावीर की राह देखता।





निश्चित रूप से इस वर्तमान में प्रभु वर्धमान महावीर की महती आवश्यकता है। पापों का दलदल इतना है कि आंखों से नीर सिसक रहा है। इस वर्तमान परिप्रेक्ष्य में प्रभु महावीर का अवतार होना और प्रभु महावीर का आना आवश्यक है।
आज की जीवन की नैया में तेज धार बह रही है। संसार मुश्किलों से घिरा है। हर व्यक्ति हर प्राणी जगत यही कह रहा है फिर आ जाओ महावीर। हिंसा की लपटे इतनी है कि आज मानवता रोती प्रतीत हो रही है। अत्याचारों को यह धरती सहन कर रही है, आज मानवता रो रही है। और अपना धीरज खो रही है। बस मन में यही भाव सजे हुए हैं। प्रभु महावीर फिर आ जाओ और आकर शांति संदेश दो, तभी यह परिवेश स्वच्छ होगा और इस मानव की तकदीर बदल जाएगी।
एक कथन बिल्कुल सार्थक सिद्ध होता है कि की जैसा खाता है अन्न वैसा ही मन हो जाता है। निर्ममता इतनी हो गई है कि वह पशुओं को मार-मार कर खा रहा है। लेकिन मानव विपरीत हो रहा है नियम यही कहता है कि जो जैसा खाता है वह वैसा ही हो जाता है। आज के पावन दिन पर हमें मांसाहार छोड़ना चाहिए। और शाकाहार को अपनाना चाहिए। तभी यह तन, मन और नीर निर्मल होंगे।
जैन दर्शन में कहा गया है,जिसने भी णमोकार मंत्र को जीवन में अपनाया है, उसके जीवन में अद्भुत परिवर्तन आया है। इसीलिए प्रभु महावीर का जियो और जीने दो का सिद्धांत अपनाए, और पुण्य की जागीर हम अपनी करें। और यही कामना करें की फिर आ जाओ महावीर फिर आ जाओ महावीर।
महावीर जयंती की अनंत शुभकामनाओं के साथ अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
