धरियावद में 88 वर्षीय मुनि श्री का समाधि मरण 24 मार्च को विमान यात्रा डोला निकाल कर आचार्य मुनि संघ सानिध्य में अग्नि संस्कार हुए।
धरियावद 
दिन रात मेरे स्वामी, में भावना यह भावु ।देहांत के समय मे तुमको न भूल जावू।मरण समय गुरु पाद मूल हो व्रत संयम पालू ,पंडित पंडित मरण हो ऐसा अवसर दो। इन सार गर्भित भावनाओ को बिरले ही भव्य जीव अपने जीवन मे चरितार्थ करते है आचार्य श्री अजित सागर जी के शिष्य मुनि श्रीपुण्य सागर से दीक्षित शिष्य 82 वर्षीय मुनि श्री पूर्णसागर जी का दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वाह्न9.40 बजे धरियावद राजस्थान में समस्त संघ सानिध्य में समाधिमरण हो गया।ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी विकास भैया लक्की रमावत ने बताया कि दोपहर 12.10 बजे समाधिस्थ 88 वर्षीय मुनि श्री पूर्णसागर जी का डोला विमान यात्रा आचार्य श्री वर्धमान सागर जी,मुनि श्री पुण्य सागर जी संघ सानिध्य और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकाला गया। मुनि श्री के डोले के आगे कमंडल लेकर भूमिशुद्धि का ,मुनि श्री के डोले को कंधे लगाने का सौभाग्य महावीर,राजेंद्र मेहता थांदला एवं परिजनों को प्राप्त हुआ। नियत समाधि स्थल परिसर में ,पंडित हंसमुख जी के निर्देशन में मंत्रोचार से स्थल शुद्धि की गई।समाधिस्थ मुनिश्री की पूजन शांतिधारा और पंचामृत अभिषेक गृहस्थ अवस्था के परिजन पुत्र महावीर,राजेंद्र थांदला एवं परिवार द्वारा किया गया। परम पूज्य मुनि श्री की समाधि के कारण संघ के सभी साधुओं ने आज उपवास किया। अग्नि संस्कार के पश्चात उपस्थित आचार्य संघ, आर्यिका माताजी एवं समस्त समाज ने परिक्रमा देकर अपनी विनियाजंलि प्रस्तुत की।
सामान्य परिचय
राजेश पंचोलिया इंदौर ने बताया कि थांदला मध्यप्रदेश के श्री रतनलाल मेहता 88वर्षीय ने मुनि श्री पुण्य सागर जी संघ समक्ष दीक्षा हेतु श्रीफल अर्पित किया। आपकी क्षुल्लक दीक्षा चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी के शिष्य परम पूज्य मुनि श्री पुण्यसागर जी के करकमलों से सिद्धक्षेत्र सोनागिर में 9/07/2023 को हुई ।आपका नूतन नामकरण जी क्षुल्लक श्री पूर्ण सागर हुआ ।आपने जन्मनगरी थांदला मध्यप्रदेश में गृहस्थ अवस्था के भतीजे मुनि श्री पुण्य सागर जी से 6/5/2024 को मुनि दीक्षा ग्रहण की। गृहस्थ अवस्था की पत्नी ने भी आर्यिका दीक्षा लेकर श्री पूर्णिमा मति बनी ।उनकी भी समाधि पूर्व में ही गई ।कुछ दिन पूर्व आपके केश लोचन भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ,मुनि श्री पुण्य सागर जी एवं अन्य साधुओं ने किए।22 मार्च 2025 को आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ,मुनि श्री पुण्यसागर जी एवम् संघ के सभी साधुओं से क्षमा याचना करक्षमा भाव धारण कर चारो प्रकार के अन्न जल आदि का आजीवन त्याग कर यम संल्लेखना धारण कर सभी प्रकार के आहार का त्याग किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ,मुनि श्रीपुण्यसागर जी सहित संघ के साधु संबोधन करते रहे।यम संलेखना धारी मुनि श्री पूर्ण सागर जी का शांत परिणामो से निराकुलता सहित दिनांक 24 मार्च 2025 को पूर्वान्ह 9.50 बजे उत्कृष्ट समाधिमरण आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ,दीक्षा गुरु मुनि श्री पुण्य सागर जी सहित 52 साधुओं के संघसानिध्य में आचार्य श्री के श्री मुख से अरिहंत सिद्ध णमोकार मंत्र सुनते हुए हुआ।क्षपक मुनि पूर्ण सागर की विमान डोलयात्रा चन्द्र प्रभु संतभवन परिसर से रवाना होकर समाधि स्थल पहुंची।

धार्मिक विधि विधान पूर्वक अंतिम संस्कार हुए

राजस्थान प्रांत के अनेक नगरों पारसोला, बांसवाड़ा, थांदला रीछा ,धरियावद,नरवाली , मुंगाडा, गामड़ी,दाहोद के हजारों गुरुभक्तों ने भाग लिया समाधिस्थल पर पूर्ण विधि विधान से विमान यात्रा पूर्व नियत स्थल पर ले गए जहाँ पर पूर्ण विधि विधान से समाधिस्थ मुनि श्री के धार्मिक संस्कार कर पूजन पंचामृत अभिषेक किए गए।
अग्नि संस्कार पूर्व गृहस्थ अवस्था के पुत्र महावीर,राजेंद्र मेहता एवम् परिजनों द्वारा किये गए।
राजेश पंचोलिया इंदौरवात्सल्य वारिघि भक्त परिवार से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
