मुझे पिच्छी कोन देगा
संस्मरण
धर्म शिरोमणी आचार्य श्री धर्म सागर महाराज 109 वे वर्ष वर्द्धन अवतरण दिवस पर विशेष संस्मरण
मुझे पिच्छी कौन देगा…
सन 1975 सहारनपुर चातुर्मास की बात है… सहारनपुर वर्षायोग बढ़ी धूम-धाम प्रभावना पूर्वक हुआ… चातुर्मास के बाद पिच्छीका परिवर्तन का कार्यक्रम था। सभी साधु मंच पर विराजमान थे… तभी आचार्य महाराज ने एक घोषणा की… की युवा पीढ़ी में जो भी व्यक्ति आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत धारण करेगा,.. वही मुझे नवीन पिच्छिका प्रदान कर पुरानी पीछी प्राप्त करेगा। … ब्रह्मचर्य और वह भी आजीवन तथा उसमें भी युवा पीढ़ी… का, व्यक्ति समाज में वा सब कुछ असंभव सा लगा,.. पर उस वर्षायोग का विशेष प्रभाव श्री विनोदकुमार शास्त्री सहारनपुर पर पढ़ा,- उनके मन में विचार आया “आत्मोन्नति के पथ पर होने का इससे अच्छा और अन्य अवसर नहीं प्राप्त होगा। संसार संवर्धन की मूल विषय वासना को समाप्त करना… ही श्रेयस्कर कार्य है.।.. और उस मूल का उच्छेद करने में भाव पूर्वक धारण किया गया ब्रह्मचर्य व्रत ही समर्थ है…।” वह व्यक्ति उठा और पहुॅचा आचार्यश्री के चरणों में तथा मन के भावों को व्यक्त किया…। संबोधन प्राप्त हुआ… आचार्य महाराज ने अपना आशीर्वाद प्रदान किया और व्रत ग्रहण कराकर पिच्छी प्राप्त की तथा अपनी पुरानी पिच्छी उस भव्यात्मा को प्रदान की।
ये तो संयम की प्रतीक है और संयम के बदले संयम मिले इससे बड़ी और क्या निधि हो सकती है।
राजेश पंचोलिया इंदौर
वात्सलय वारिधि भक्त परिवार
