आचार्य वर्धमानसागर जी का 22 वर्षों बाद 33 साधुओं और नगर गौरव मुनिराज ,आर्यिका माताजी के साथ होगा 23 फरवरी को भव्य मंगल प्रवेश 18 साधु करेंगे आगवानी।
धरियावद। 

घरियावद नगर जहां अनेक जिनालय है यह अनेक साधुओं की जन्म भूमि ,कर्म भूमि, दीक्षाभूमि ,समाधि भूमि , पंचकल्याणक भूमि में प्रथमाचार्य शांति सागर जी महाराज की परंपरा के पंचम पट्टाधीश वात्सल्यवारिधी आचार्य वर्धमानसागर जी महाराज अपने 33 साधुओं सहित 22 वर्षों के बाद भव्य मंगल प्रवेश कर रहे हैं। आचार्य वर्धमानसागर दिनांक 23/2/2025 को बहु प्रतीक्षित नगर प्रवेश करेंगे नगर में पूर्व से विराजित मुनि पुण्यसागर अपने साधुओं सहित आचार्य वर्धमान सागर की आगवानी चरण वंदना करेंगे । इसके पूर्व परम पूज्य वात्सल्य वारिधि राष्ट्रगौरव आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित का22 फरवरी को महु दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पर प्रथम बार हुआ मंगल प्रवेश समाज जन ने की भव्य अगवानी आचार्य संघ सानिध्य में मूल श्री जी का भव्य पंचामृतअभिषेक ,शांति धारा सौभाग्यशाली परिवार द्वारा की गई।आहार और सामायिक के बाद आचार्य संघ का दोपहर 3 बजे धरियावाद की ओर मंगल विहार हुआ।धरियावाद में विराजित वात्सल्य मूर्ति मूनि श्री पुण्य सागर जी महाराज संघ सहित महु अतिशयक्षेत्र पहुँचकर अपने गुरू आचार्य श्री की चरण वंदना की। आचार्य श्री संघ का रात्रिविश्राम धरियावाद के समीप बालिका छात्रावास के पास नरेश सरिया के निजी आवास पर हुआ।23 को प्रात काल 8बजे नगर में भव्य मंगल प्रवेशहोगा सुनील,,नीलेश , राकेश अनुसार आचार्य वर्धमान सागरकी आहार चर्या 22 फरवरी को अतिशय क्षेत्र मऊ में हुई। संघ का 23 फरवरी को धरियावद मंगल प्रवेश होगा । सन 1950 में जन्मे 75 वर्षीय आचार्य वर्धमान सागर 24 फरवरी सन 1969 में दीक्षित होकर आपको आचार्य पद 24 जून सन 1990 में प्राप्त हुआ। 75 वर्षीयआचार्य वर्धमान सागर मुनि चिन्मय सागर,हितेंद्रसागर,प्रशमसागर,प्रभवसागर,चिंतनसागर,दर्शितसागर,प्रबुद्धसागर ,मुमुक्षुसागर,प्रणितसागर।शुभमति,शीतलमती,चैत्यमती वत्सलमति ,विलोकमति , दिव्यांशुमति, पूर्णिमामति , मुदितमति, विचक्षणमति , समर्पितमति, निर्मुक्तमति, विनम्रमति , दर्शनामति, देशनामति, महायश मति, देवर्धिमति, प्रणतमति, निर्मोहमति, पद्मयशमति दिव्ययशमति, प्रेक्षामति, जिनेश मति, क्षुल्लक विशालसागर , क्षु प्राप्तिसागर सहित कुल 34 पीछी सभी जिनालयों के दर्शनकर आचार्य श्री आशीर्वाद उपदेश देंगे । नरसिंहपूरा एवं दशाहूमड दिगम्बर समाज अध्यक्ष ने बताया कि विशाल मुनिसंघ के आगमन को लेकर जैन समाज ही नहीं वरन सम्पूर्ण नगरउत्साहित हैं।नगरको दुल्हन की भांति सजाया गया है घर-घर पर रोशनी और फ्लेक्स कट आउट लगाए गए हैं घरों के सामने रंगोली बनाई जा रही है। समंतभद्र स्कूल के विद्यार्थी सहित नगर के पुरुष महिलाये धार्मिक मंडल निर्धारित वेषभूषा में अगवानी करेंगे । वर्ष 2001 में वर्षायोग आचार्य श्री ने इसी नगर में किया था ।आचार्य वर्धमान सागर का धरियावद से बहुत पुराना संबंध है वर्ष 2001 का वर्षायोग धरियावद में किया इसके पूर्व वर्ष 2002 में आप धरियाबाद विराजित थे। उस समय अनेक समाधिया आपके सानिध्य में हुई यहां से 29 अप्रैल 2002 को बिहार कर आप सनावद गए थे इसके पश्चात आपका आगमन पुनः वर्ष 2003 में धरियाबाद में हुआ । अक्टूबर माह में आर्यिका दीक्षा दी ।14 दिसंबर 2003 को धरियावद से बिहार किया
अनेक शिखर बंद जिनालयों की नगरी धरियावद नगर में 1008 श्री चंद्रप्रभु बड़ामंदिर ,श्री पदमप्रभु दिगंबर मंदिर, श्री आदिनाथ मंदिर श्री महावीरमंदिर ,श्री चंद्रप्रभु मंदिर नंदनवन ,श्री आदिनाथ मंदिर नसिया जी सहित तीन चैत्यालय नगर में है
अनेक साधु की जन्म कर्म भूमि
नगर गौरव साधुओं की विस्तृत श्रृंखला
ब्रह्मचारी गज्जू भैया एवं राजेश पंचोलियाअनुसार आचार्य वर्धमानसागर महाराज द्वारा नगर में अनेक दीक्षित शिष्य है जिनमें समाधिस्थ मुनि श्रेयससागर , समाधिस्थ मुनि पद्मकीर्ति सागर , मुनि मुमुक्षुसागर संघस्थ हैं,समाधिस्थ आर्यिका श्रेयमति , समाधिस्थ आर्यिका योगीमति,आ प्रेक्षामति होकर आप वर्तमान में आचार्य संघ में साथ में है।इसी प्रकार मुनि पुण्यसागर से नगर के मुनि उदितसागर,आर्यिका उत्साह मति है । समाधिस्थ मुनि सुधर्मसागर, समाधिस्थ मुनि उदय सागर,समाधिस्थ मुनि समाधि सागर नगर गौरव हैं ।आर्यिका प्रेक्षामति दीक्षा के बाद प्रथम प्रवेश करेंगे।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्तपंडित हंसमुख शास्त्री इसी धरियावद नगर के है।
विश्व का सबसे छोटा 37शिखरो वाला जिन मंदिर नंदनवन धरियावद में प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख शास्त्री द्वारा निर्मित नंदनवन में विश्व का सबसे छोटा 37 शिखरो वाला श्री चंद्र प्रभु जिनालय स्थित हैराजेश पंचोलिया इदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
