आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर संस्मरणों एवं काव्य रचना के द्वारा दी गई भाव भीनी विनयांजलि

धर्म

आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि दिवस पर संस्मरणों एवं काव्य रचना के द्वारा दी गई भाव भीनी विनयांजलि
रामगंजमंडी
विश्व वन्दनीय महामना आचार्य गुरुवर 108 विद्यासागर महाराज के प्रथम समाधि दिवस पर समस्त स्थानों पर अनेक आयोजनों के साथ विनयांजलि दी गई इसी क्रम में रामगंजमंडी राजस्थान में श्री शांतिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मंगलवार की संध्या बेला में विनयांजली सभा का आयोजन किया गया।

 

 

सभा के प्रारंभ में आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर सभा का शुभारंभ हुआ। सभा का सञ्चालन प्रशांत जैन “आचार्य” ने किया।

 

 

आचार्य श्री जी के उन्नत भारत के स्वप्नों पर सर्वप्रथम श्री अभिषेक जैन लुहाडिया ने कहा की आचार्य श्री केवल जैनसंत नहीं जनसंत थे उन्होने हथकरधा स्वेदशी स्वरोजगार स्वालंबन की प्रेरणा दी, इंडिया नहीं भारत बोलो का उद्घोष किया, साथ ही उन्होने कैदियों को एक जीवन प्रदान किया। उन्होने जब काव्य रचना को सुनाया “ये सागर से गहरे हिमालय से ऊंचे इन्हे कौन बांधे इन्हे कौन रोके” तो सभी भाव विभोर हो उठे

नितिन जैन ने आचार्य श्री द्वारा बताए मार्ग पर चल सके यही सच्ची विनयांजलि होगी उन्होने कहा जब भी हम आचार्य श्री के दर्शन करते थे एक नयी ऊर्जा का संचार होता था। इस अवसर पर ममता जैन गुरूजी के प्रति मुक्तक प्रस्तुत किया साथ ही पुष्पलता रावका ने संस्मरण को सुनाते हुए कहा की आचार्य श्री के आशीर्वाद मे चमत्कार था जो मैने देखा है श्रीमति निर्मला सुरलाया ने गुरु के प्रति काव्य रचना को सुनाते हुए कहा समाधि के दिन की सुचना को सुनाया तो सभी भावुक हो उठे इसी क्रम मे श्री शोभित जैन ने गुरूजी के जीवन पर उनकी साधना से जुडे संस्मरण को सुनाया जंगल मे भी मंगल है गीत के द्वारा अपने भाव प्रकट किए ।

श्री सुरेन्द्र जैन सागर ने आचार्य श्री मे बहुत बड़ी शक्ति थी उनसे लिया गया नियम आज भी निर्विकल्प पल रहा है उन्होने सागर मे हुए चातुर्मास का संस्मरण को सुनाया

जब वे छोटे थे टीना काला ने इस रात से गहरी रात कोई और नहीं होगी को सुनाया श्री निर्मल जैन लाम्बाबांस ने आचार्य श्री के प्रति अपने भाव प्रकट किए और कहा की आचार्य श्री का उपदेश प्राणी मात्र के कल्याण के लिए था

यह भी पुण्य है कीआचार्य श्री के चरण रामगंजमंडी मे आ गए

 

श्री पदम सुरलाया ने गुरु चले गए लेकिन गुरु आज हमारे मन मे है इस अवसर पर मोहित जैन एवम शकुन्तला बागडिया ने भी अपने भाव प्रकट किए
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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