श्रावक को दान चार प्रकार के, उसमे भी उत्कृष्ट आहार दान- मुनि 108 श्री अनुपम सागर जी महाराज

धर्म

श्रावक को दान चार प्रकार के, उसमे भी उत्कृष्ट आहार दान- मुनि 108 श्री अनुपम सागर जी महाराज
देवली,
चर्या शिरोमणि आचार्य108 श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के युगल शिष्य में मुनि श्री 108 अनुपम सागर जी महाराज ने एवम श्रमण मुनि 108 श्री यतीन्द्र सागर जी महाराज ने आज धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए दान की महिमा को बताया की प्रत्येक श्रावक को दान करना चाहिए, दान चार प्रकार के बताए गए उसमे आहार दान, औषध दान, ज्ञान दान, अभय दान। इन सबमे भी सर्वश्रेष्ठ आहार दान को महत्व दिया गया, ओर बताया की श्रावक के आवश्यक कर्तव्यों में से साधु को आहार दान देना भी आवश्यक है!

 

जानकारी देते हुएओमप्रकाश जैन(टोरडी) ने बताया की इसी श्रंखला में युगल मुनिराज ने जीवन जीने की कला एवं Anger Management(क्रोध पर नियंत्रण) की विधि भी सिखाई! मुनि श्री ने क्रोध के लक्षण बताते हुए बताया की भुख न लगना, नशा करना, अपशब्दों का प्रयोग करना, बड़बड़ करना, नजरें न मिलाना, अकेला पन महसूस करना, अभक्ष्य पदार्थो का सेवन करना,उपेक्षा करना जैसे कई उदाहरण दिए जो की मनुष्य के क्रोध का निमित्त बनते है और इसी क्रोध में मनुष्य अपने गृहकलेश का कारण बनता है, घर की शांति भंग करने के निमित बनते है!

 

मुनि श्री ने इनका निदान बताते हुए बताया की हमे सदैव शुद्ध शाकाहरी भोजन करना चाहिए, क्रोध आने पर पहले 2मिनिट सोचकर फिर उसपे प्रतिक्रिया देनी चाहिए,जिद पे नही अड़ना चाहिये, सोने का समय निर्धारित होना चाहिए, 10बजे तक सोने का एवं 5.30 तक हर सम्भव उठ जाना चाहिए यही सर्वश्रेष्ठ समय होता है, ओर भी कई उदाहरण मुनि श्री ने क्रोध को नियंत्रण करने के संदर्भ में दिए!

 

दिनांक 29 जनवरी के प्रवचन युगल मुनिराज ने महावीर मन्दिर गांधी पार्क के पास में किये! 

 

 


युवा परिषद प्रवक्ता विकास जैन(टोरडी) ने अधिक जानकारी देते हुए बताया की मुनि संघ के सानिध्य में 28 जनवरी की शाम भगवान आदिनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक दिवस के उपलक्ष्य में संगीतमय भक्तामर स्त्रोत का पाठ महाआरती का आयोजन पार्श्वनाथ धर्मशाला में हुआ! महाआरती करने का सौभाग्य शिखर चंद ज, उत्तम कुमार , संजय जैन कालेड़ा परिवार को प्राप्त हुआ! उससे पूर्व मुनि संघ के सानिध्य में शांतिनाथ जैन मंदिर में 1008 मन्त्रो के साथ भगवान की शांतिधारा की गई!

 

मुनि संघ ने 29 जनवरी को दोपहर 3बजे देवली से जहाजपुर के लिए विहार किया,ओर मुनि संघ ने समाज को एकता के सूत्र में पिरोये रखने की बात कही और कहा की सन्त आते है चले जाते है लेकिन समाज को सदैव एक मुठी की भांति बन्द कर रहना चाहिए! जहां मुनि श्री के केशलोंच सम्पन्न होंगे! मुनि श्री का विहार केकड़ी से इंदौर के लिए चल रहा है एवं सम्भवतः मुनि संघ मार्च के अंत तक इंदौर सुमति धाम पहुंचेंगे जहां अचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज का पट्टाचार्य महोत्सव मनाया जाएगा जिसमे लगभग 450 साधु साध्वी तथा कई गणमान्य नागरिक सम्मिलित होंगे! मुनि संघ के विहार में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया एवं संघ का रात्रि विश्राम बोरानी में हुआ।!
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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