बोलकर सोचने से बेहतर है, सोचकर बोलना, औरपाप कार्य के अन्जाम को देखकर, अशुभ करना..! अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी

धर्म

बोलकर सोचने से बेहतर है, सोचकर बोलना, औरपाप कार्य के अन्जाम को देखकर,अशुभ करना..! अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी
सोनागिरजी
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी ने महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा की बोलकर सोचने से बेहतर है, सोचकर बोलना, औरपाप कार्य के अन्जाम को देखकर, अशुभ करना..!

 

उन्होंने कहा जो कार्य गलत हो, अशुभ हो, पाप हो, उसे आज मत करो और जो कार्य शुभ हो, मंगल हो, पुण्य हो, उसे कल मत करो। ऐसा करने से, मन निर्मल और दिन मंगलमय हो जायेगा। क्योंकि* –जो करने से पहले सोचते हैं, वो प्रज्ञावान, समझदार है। 

 

उन्होंने कहा जो अशुभ करते वक्त सोचते हैं, वो बुद्धिमान है, और जो करने के बाद सोचते हैं, वो मूर्ख है। इसलिए आप शादी के बाद सोचते हैं, काश……!? माँ गंगा से एक युवक ने पूछा* – दुनिया भर से लोग आपके पास आते हैं, अपने पाप तुम में डालकर चले जाते हैं, तुम उनके पापों का क्या करती हो-? गंगा ने कहा- बेटा, मैं उन पापों को समुद्र को दे देती हूं।

 

 

 

युवक ने समुद्र से पूछा-? समुद्र ने कहा* – मैं दुनिया के पाप को अपने पास नहीं रखता हूं – मैं उन्हें बादल के रूप में बादलों को दे देता हूं। युवक ने बादलों से पूछा-? तुम सबके पाप का क्या करते हो-? बादलों ने हँसकर के कहा – भाई जिसका पाप होता है, मैं उसी के घर पर, उसी के सिर पर बरसा देता हूं।

महाराज श्री ने कहा आज हम जो
कर्मों का बीजारोपण कर रहे हैं, उस वृक्ष पर फल तो जरूर आयेंगे। इतना जरूर हो सकता है कि टमाटर का पौधा लगाओगे तो दो चार महिने में फल आ जायेंगे, और आम का लगाओगे तो दो चार वर्ष समय का इन्तजार करना पड़ेगा। कहने का मतलब है – अपने पापों का फल स्वयं को ही भोगना पड़ता है।*देर सबेर, वह अपने सिर पर आकर जरूर बरसेगा। इस भ्रम में मत रहना कि गंगा में नहाने से पापों से मुक्त हो जाओगे।

जब तक गंगा जैसी पवित्रता, आचरण में प्रकट नहीं होगी तब तक पापों से मुक्त होना असंभव है…!!!। नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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