हमें पर्यटन नहीं धार्मिक तीर्थ स्थान चाहिए-पंजाब राज्यपाल श्री गुलाबचन्द कटारिया पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया ने नवग्रह तीर्थ वरूर पहुंचकर जगद्गुरू गणाधिपति गणधराचार्य श्री कुंथुसागर जी गुरुदेव एवं सभी आचार्य भगवंत का आशीर्वाद प्राप्त किया
नवग्रह तीर्थ वरूर
नवग्रह तीर्थ वरूर जहां-एक ऐतिहासिक अंतर्राष्ट्रीय पँचकल्याणक महा महोत्सव संपन्न हो रहा है। यहाँ गणाधिपती गणधराचार्य श्री कुंथुसागरजी महाराज ससंघ सानिध्य एवं राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुणधरनंदीजी महामुनिराज के मार्गदर्शन में आयोजित 405 फिट उत्तुंग सुमेरु पर्वत की जिन प्रतिमाओं का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव भक्ति भाव के साथ हुआ है। जिससे जैन धर्म की ध्वजा संपूर्ण विश्व में प्रसारित हुई है।माननीय महामहिम उप राष्ट्रपति सहित अनेक संगीतकारों राजनेताओं,अनेक धर्मों के प्रसिद्ध संतों ने आकर इस आयोजन में अपनी सहभागिता दी है और अपने आपको पुण्यशाली माना है।
बुधवार की अनुपम बेला में महामस्तकाभिषेक का शुभारंभ हुआ।
22 जनवरी को दोपहर में पंजाब के महामहिम राज्यपाल श्री गुलाबचंद कटारिया एवं श्रीमती अनिता जी कटारिया की उपस्थिति में महामस्तकाभिषेक महोत्सव की शुरुआत हुई श्री गुलाबचंद कटारिया ने गणधराचार्य श्री कुंथुसागरजी महाराज एवं सभी आचार्य भगवंतों का आशीर्वाद प्राप्त किया महामहिम राज्यपाल महोदय की उपस्थिति में सुमेरु पर्वत पर अति विशाल कलशारोहण किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र कमेटी द्वारा राज्यपाल महोदय का अभिनंदन एवं स्वागत किया गया। राज्यपाल महोदय के मंच पर आसीन होने के पूर्व राष्ट्रगान किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रसंत आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने राज्यपाल महोदय को विशेष आशीर्वाद प्रदान किया और बताया कि पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाबचंद जी कटारिया ने अपने निष्कलंक व्यक्तित्व से इस उच्च पद को प्राप्त किया है।

आप हमारे गुरुदेव आचार्य श्री के अनन्य भक्त हैं।सदैव गुरुदेव का स्मरण करते रहते हैं। श्री कटारियाजी धर्मनिष्ठ व्यक्तित्व हैं वे सदा संतों का आशीर्वाद लेने एवं जैन समाज के कार्यक्रमों में पहुंचकर अपनी सहभागिता प्रदान करते हैं।

राज्यपाल श्री गुलाबचन्द जी ने कहा कि मैं यहाँ राज्यपाल बनकर नहीं आया हूँ मैं तो पूज्य गुरुदेव का छोटा सा भक्त बनकर आया हूँ और गुरुदेव से यहीं कामना करता हूँ कि जब भी हमारा मरण हो तब एक श्रावक के रूप में हमारा समाधि मरण हो। पूज्य आचार्य भगवंत श्री कुन्थुसागरजी गुरुदेव ने कहा कि गुरुभक्ति के कारण ही हमारे परम भक्त श्री कटारिया जी इस उच्च पद तक पहुँचे हैं। हमारे परम शिष्य राष्ट्र संत आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ने इस नवग्रह तीर्थ पर महामेरू की रचना करके हमारे नाम को पूरे विश्व में फैलाया है।





इस अवसर पर आचार्य श्री पद्मनंदी जी ससंघ, आचार्य श्री देवनंदीजी ससंघ,आचार्य श्री कुमुदनंदीजी,आचार्य श्री गुप्तिनन्दी जी ससंघ, आचार्य श्री गुणधरनंदी जी ससंघ, चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुविधिसागरजी ससंघ, सप्तम पट्टाचार्य श्री अनेकांत सागरजी ससंघ, आचार्य श्री गुणभद्रनंदीजी ससंघ, आचार्य श्री सूर्यसागरजी, आचार्य श्री गुलाबभूषणजी, आचार्य श्री दयाऋषिजी, आचार्य श्री विमलेश्वर जी आदि16आचार्य संघ के साधु संत,सभी14 भट्टारक, गणिनी आर्यिका माताओं के संघ आदि अनेकों आचार्य संघ,सैकड़ों दिगंबर जैन मुनि, आर्यिका, क्षुल्लक क्षुल्लिका ब्रह्मचारी ब्रह्मचारिणी उपस्थित थे।

इस अवसर पर नव ग्रहों अधिपति नव तीर्थंकर भगवान की प्रतिमाओं पर सबसे पहले सभी मूर्ति प्रदाता पुण्यार्जक परिवार के द्वारा पँचामृत द्रव्यों से महामस्तकाभिषेक का शुभारंभ हुआ। श्री संदीप साहू जी से मिली जानकारी अनुसार 21जनवरी को शाम लेजर शो के द्वारा भगवान का अभिषेक दिखाया गया।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312
