सुनो सब और सुनो सबकी रहो खुद में करो मन की प्रसन्नसागर महाराज
सोनागिरी जी
अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज ने मंगल प्रवचन में कहा किसुनो सब — और सुनो सबकी..रहो खुद में — करो मन की..–क्रोध, ईर्ष्या, अपमान, घृणा के मामले में भी यही होता है। जब प्रतिकार नहीं किया जाता है, तो ये सब उसके पास रह जाते हैं जो आपको दे रहा होता
जीवन रंग भूमि है, इसे रण भूमि मत बनाओ।
*रंग भूमि का मतलब है* महाराज श्री- ने कहा जहाँ सुख, चैन, शान्ति ही शान्ति हो, और रण भूमि का मतलब है- जहाँ क्रोध, द्वेष, ईर्ष्यालु और मन की अशान्ति ही अशान्ति हो।



फिर वहाँ आदमी नहीं, आदमी की जुबान चलती है. नरेंद्र अजमेरा
पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


