परम पूज्य आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के मंगल विहार में रामगंज मंडी के भक्तों ने दी सहभागिता दान देने से ही कर्मों का क्षय होता है आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज

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परम पूज्य आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के मंगल विहार में रामगंज मंडी के भक्तों ने दी सहभागिता दान देने से ही कर्मों का क्षय होता है आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज

रामगंजमंडी
शुक्रवार की प्रातः बेला में आचार्य श्री का मंगल विहार संजय मित्तल के तोल कांटे से भीलवाडी ग्राम के सरपंच बालचंद जी के आवास पर हुई। आचार्य श्री झालरापाटन की ओर अपने कदम बढ़ा रहे हैं। मंगल विहार के रामगंज मंडी के श्रीमान संजय मित्तल, चक्रेश जैन ने अपनी सहभागिता प्रदान की पूज्य आचार्य श्री के मंगल विहार में झालरापाटन एवं भवानमंडी के भक्त भी सम्मिलित रहे। पूज्य गुरुदेव का रात्रि विश्राम कपासिया स्कूल में होगा। एवं शनिवार की प्रातः बेला में झालरापाटन में नगर प्रवेश होगा।

पूज्य आचार्य श्री ने अपनी वाणी से दान का महत्व बताया उन्होंने बताया किदान देने से कर्मों का क्षय होता है और पुण्य का अर्जन हो पाता है। श्रेष्ठ पात्र को जब पूरी श्रद्धा व नवधा भक्ति के साथ आहारदान दिया जाता है, तब तीर्थंकर प्रकृति का संचय होता है। दान के साथ अपने दोषों का भी निवारण करना चाहिए।

उन्होंने जर्दा तंबाकू खाने पर भी खड़ी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भले ही कैंसर जैसा भयानक रोग भी क्यों ना हो, तब भी व्यक्ति तम्बाकू खाया जा रहा है। फेफड़े भले ही गल जाएं, तब भी बीड़ी-सिगरेट फूंकी जा रही है।

 

जीवन नारकीय होने पर भी मांस-मदिरा का सेवन नहीं छूटता। जब ऐसी स्थितियां विद्यमान हैं तब दान-पुण्य का प्रतिफल कैसे मिले ? दान से पहले मर्यादित जीवन शैली होनी चाहिए। व्यसनों का त्याग हो, बुराईयों से मुक्त हो, तभी तो नवधा भक्ति में पवित्रता आ पाएगी। मन के मैल धोने के बाद जब दान किया जाता है तब पत्थर भी सोना बन जाता है।

सच्ची श्रद्धा के विषय में भी आचार्य श्री ने कहा कि सच्ची श्रद्धा तभी उपजती है जब मन गंगाजल की तरह पावन हो। पावनता का नाम ही तो धर्म है। दान-धर्म के अनुसरण से अपना ही भला नहीं होता वरन् दूसरे का भी उपकार होता है। आत्मा अनन्त सुखों को प्राप्त कर पाती है।

यह संसार आज भी संतों की बदौलत बचा हुआ है। संत ही सबके सामने आदमी के खोट पर चोट करता है और उनका यह ऑपरेशन बहुत कारगर होता है। जो जीव;भव्य होते हैं, वे गलत मार्ग छोड़कर सही राह पर आ जाते हैं और जो जीव अभव्य होते हैं उन्हें प्रकृति एक दिन अच्छा सबक सिखाकर प्रायश्चित्त के लिए विवश कर देती है। इसलिए संतों के ऑपरेशन से कभी भागना नहीं चाहिए वरन् अपना परम सौभाग्य समझकर उनकी कड़वी दवा से अपने को सुधार लेना चाहिए।

महाराज श्री ने ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि बंधुओ ध्यान रखना संतों की फटकार और उनके कड़े वचनों में भी बहुत आशीर्वाद छुपा हुआ होता है। अपने जीवन को यदि सुखमय व मंगलमय बनाना है तो संत की आध्यात्मिक सर्जरी से अपनी आत्मा पर चिपकी बुराईयों को मिटा देना। ध्यान रखना- शरीर का इलाज अस्पताल में हो जाएगा लेकिन दूषित व अपवित्र मन का निदान संत समागम से ही होगा।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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