पंचकल्याणक के उपरांत बड़ा जैन मंदिर में मूलनायक भगवान का हुआ प्रथम मस्तकाभिषेक निर्यापक मुनि श्री समता सागर महाराज संघ सानिध्य में संपन्न
(वारासिवनी)
“पंचकल्याणक प्रतिष्ठा उपरांत” उपसंहार में नव निर्मित मुख्य बड़ा जैन मंदिर के नव प्रतिष्ठित मूलनायक भगवान विमलनाथ का प्रथम मस्तकाभिषेक निर्यापक श्रमण समतासागर महाराज ससंघ सानिध्य में तथा भोपाल चातुर्मास कर डोंगरगढ़ की ओर विहार कर रही ज्येष्ठश्रैष्ठ आर्यिका रत्न दृणमति माताजी,चिंतनमति माताजी, निष्काम मति,सौम्यमति माताजी ससंघ सानिध्य में संपन्न हुआ।
इस अवसर पर निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 समतासागर महाराज ने वारासिवनी की जैन समाज को संबोधित करते हुये कहा कि विगत दिनों आप सभी ने “जिनशासन की ऐतिहासिक प्रभावना की मुनि श्री ने कहा कि जब पंचकल्याणक महामहोत्सव की शुरुआत में जब ध्वजारोहण हुआ तो ध्वजा पश्चिम की ओर गई इसका आशय था कि समय पर जल की बरसात के साथ धन की बरसात भी होगी जल की बरसात तो आप सभी ने देखी ही और धन की बरसात भी हुई मूलनायक भगवान विमलनाथ का यह चमत्कार ही माने कि दो दो संघ का सानिध्य तो मिला उपसंहार में ज्येष्ठ श्रैष्ठ आर्यिका संघ का सानिध्य भी सानिध्य मिल गया।

मुनि श्री ने सन् 1984 की याद करते हुये कहा कि वारासिवनी में गुरुवए आचार्य श्री के संग हम आए थे उस समय वारासिवनी में बहुत ज्यादा भीड़ थी श्री सम्मेदशिखर जी से संघ की वापसी हुई थी, प्रथम दिन ही आचार्य श्री काअंतराय हो गया,हम भी नई उम्र के थे उतनी ज्यादा जबाबदारी भी नहीं थी फिर भी आचार्य श्री ने
दोपहर का प्रवचन करने मुझे ही भेजा उन्होंने सन्1993 मड़िया जी के पंचकल्याणक को स्मरण करते हुये कहा पंचकल्याणक के पश्चात सारा माहौल उजड़ा उजड़ा दिख रहा था सभी साधुओं का मंगल विहार चल रहा था हम आचार्य श्री के साथ चल रहे थे

हमने कहा कि आचार्य श्री पहले यहा पर स्वर्ग नगरी अयोध्या बसी हुई थी और अब जबकि पंचकल्याणक संपन्न हो गये है तो सुना सुना नजर आ रहा है तो आचार्य श्री जबाव दिया कि भरे हुये बाजार तो सभी देखते है उजडे़ हुये बाजार भी देखना चाहिये आचार्य श्री ने संदेश देते हुये कहा कि संयोग और वियोग में सभी को “समताभाव” रखना चाहिये।

इस अवसर पर वरिष्ठ आर्यिका 105दृणमति माताजी ने कहा कि विगत एक माह से निरंतर भोपाल से आचार्य श्री विद्यासागर तपस्थली भूमी डोंगरगढ़ की ओर चल रहा है और हमें जानकारी मिली कि वारासिवनी में निर्यापक श्रमण समतासागर महाराज विराजमान है। मैं सोच रही थी कि पंचकल्याणक तो समाप्त हो गये है और उजड़ा हुआ पांडाल मिलेगा लेकिन हम देखते है कि यहा पर मूलनायक भगवान का प्रथम महामस्तकाभिषेक देखने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने निर्यापक श्रमण मुनि श्री समतासागर महाराज की वंदना करते हुये कहा कि लगभग 650 कि. मी. का हमारा विहार हो चुका है एवं 120 कि. मी का विहार अभी बाकी है

लेकिन इस बीच में निर्यापक श्रमण मुनि श्री का दर्शन करने से हम लोगों की थकान दूर हो गई है। उन्होंने कहा कि मोक्षमार्ग में तो वैसे भी हम लोग कभी थकते नहीं है शपथ है शपथ”



प्रवक्ता अविनाश जैन एवं प्रचार प्रमुख दीपक जैन ने बताया कि वारासिवनी में आर्यिका दृणमति माताजी के संघ का प्रथम बार आगमन हुआ है अध्यक्ष संजय कांसल ने आर्यिका संघ से श्री फल समर्पित कर रुकने का आग्रह किया। मुनि श्री को आहार कराने का सौभाग्य सचिन कांसल परिवार को मिला दोपहर बाद मुनिसंघ का मंगल विहार गोंदिया की ओर हुआ आगामी 23एवं 24 जनवरी को वहा पर रामदेव कालोनी में वेदी प्रतिष्ठा का कार्यक्रम है। इस अवसर पर संघस्थ बाल ब्र. अनूप भैया,रिंकू भैया मुनिसेवक सुबोध भुसावल,सौरभ सुल्तानपुर साथ में चल रहे है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
