स्वयं को बदले परिस्थितियों को नहीं :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी

धर्म

स्वयं को बदले परिस्थितियों को नहीं :- गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी
गुन्सी

श्री दिगम्बर जैन सहस्रकूट विज्ञातीर्थ, गुन्सी (राज.) के तत्वावधान में गणिनी आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के संसंघ सान्निध्य में 1008 दिवसीय श्री जिनसहस्रनाम का अखण्ड मंगल पाठ में समाज सेविका कंचनबाई सेठी नांदेड़ ने सहभाग लिया। तत्पश्चात् भगवान पुष्पदंतनाथ भगवान जी के गर्भ कल्याणक महोत्सव के उपलक्ष्य में संघ द्वारा भगवान की स्तुति की गई।

 

 

प्रातः कालीन शांतिधारा करने का सौभाग्य गुरू भक्त प्रकाशचंद सेठी नांदेड़ वालों ने प्राप्त किया।
पूज्य माताजी की आहारचर्या कराने का सौभाग्य मणिदेवी अजमेरा किशनगढ़, अनिल भाणजा निवाई एवं व्रती आश्रम के व्रतियों ने प्राप्त किया। गुरूभक्त जिनेन्द्र सेठी मिलाप नगर, जयपुर वालों ने गुरूमाँ का मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया एवं निर्माणाधीन सहस्रकूट जिनालय का अवलोकन किया। 
माताजी ने प्रवचन सभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधन देते हुए कहा कि- डोर लंबी हो इसका मतलब यह नहीं की पतंग बहुत ऊपर तक जायेगी। उड़ाने का तरीका आना चाहिये, दौलत ज्यादा होने का मतलब सफल जीवन नहीं, जीने का सलीका आना चाहिये। जीवन तब कठिन लगता है जब हम स्वयं को बदलने की बजाय परिस्थितियों को बदलने का प्रयास करते है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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