प्रकृति का नियम है जो सहन करता है..वो शहंशाह बन जाता है..! आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज

धर्म

प्रकृति का नियम है जो सहन करता है..वो शहंशाह बन जाता है..! आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज
छतरपुर
अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज की कुलचाराम से बद्रीनाथ अहिंसा संस्कार पदयात्रा चल रही है जन्मभुमि छतरपुर में धर्म सभा संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि
प्रकृति का नियम है जो सहन करता है..वो शहंशाह बन जाता है..!

 

उन्होंने कहा जीवन के विकास में हमारी सोच की भुमिका बहुत महत्वपूर्ण है। ऊंचे कुल में जन्म लेना या कुलीन घर में लालन-पालन ही पर्याप्त नहीं है। इसलिए व्यक्ति जन्म से नहीं, कर्म से महान बनता है। कर्म की उच्चता और पवित्रता ही हमारे लक्ष्य को शिखर जैसी महान ऊचाईयां प्रदान कराती है। विलक्षणता स्वर्ग से नहीं टपकती या उनकी कोई अलग प्रजाति नहीं होती,, लेकिन उनकी ऊंची सोच, दूर दृष्टि, सकारात्मक प्रभावी कार्य शैली उन्हें देश, काल और समाज में ऊंचे आसन पर बैठा देती है।

ये सत्य है कि जो विचार घर, परिवार, समाज, देश और राष्ट्र की दशा व दिशा बदलने की क्षमता रखते हों और जो दूसरों की उदासी, खीज, पश्चाताप और घनी ऊब को उम्मीद, विश्वास की रोशनी से जग मगाने की शक्ति रखते हों, वे ही इस संसार और जीवन के तारणहार है, वन्दनीय और अभिनन्दनीय है। अक्सर हम कठिन परिस्थितियों से डर कर या घबराकर असफ़लता से समझौता कर लेते हैं।

 

जबकि हर एक के जीवन में परीक्षाएं, विपरीत स्थितियां – मन, शरीर और आत्म विश्वास को सुदृढ़ बनाने के लिए आती है। चूंकि हमारी दुर्बल सोच, कमज़ोर मन, अपने मन्तव्य और गन्तव्य से विस्मृत हो जाता है,, लेकिन दृढ़संकल्प वाला व्यक्ति, विषम परिस्थितयों में लोहा लेने से, उनसे पार पाने के लिए प्रतिपल संकल्पित होता है।

सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति असफ़लता में भी सफलता की रोशनी देख लेता है। वह असफ़लता को अपना दुश्मन नहीं बल्कि जूझने की प्रेरणा देने वाला प्रशिक्षक मानता है।

 

असफ़लता में ही सफलता के सबक छिपे होते हैं।
सकारात्मक सोच किसी के भी जीवन को चार चांद लगा सकती है।
जीवन में सारा खेल किस्मत, सोच और पुण्य का है। यदि सारा खेल दिमाग का होता तो बीरबल बादशाह बन जाता…!!! नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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